UP में 33 लाख महिलाएं हर महीने कमा रहीं 1 लाख रुपये, लखपति दीदी योजना बनी गेम चेंजर

उत्तर प्रदेश में 'लखपति दीदी' योजना महिलाओं को सशक्त बना रही है. सरकार के प्रयासों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर, महिलाएं छोटे कारोबार शुरू कर रही हैं. इससे न केवल उनकी आय बढ़ी है, बल्कि वे परिवार का आर्थिक सहारा भी बन रही हैं. 33 लाख महिलाएं अब हर महीने एक लाख रुपये तक कमा रही हैं.

यूपी में लखपति दीदी योजना से ग्रामीण महिलाएं बनीं आर्थिक सहारा Image Credit:

उत्तर प्रदेश में महिलाएं अब आर्थिक स्वावलंबन के माध्यम से सफलता की नई कहानियां गढ़ रहीं हैं. लखपति दीदी योजना से कई महिलाएं हर महीने एक लाख रुपये तक की कमाई कर रहीं हैं. पिछले नौ साल में महिला सशक्तीकरण के लिए प्रदेश सरकार ने तत्परता से योजनाओं का क्रियान्वयन किया है जिससे यह उपलब्धि हासिल हो पायी.

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत प्रदेश में 33 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बनने की दिशा में अग्रसर हैं. आत्मनिर्भरता की सशक्त मिसाल हैं आजमगढ़ जिले की हुस्नआरा खातून जो तैबा स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं . वे रेशमी साड़ी निर्माण के काम से जुड़ीं हैं. उनका कारोबार दो साल में बारह गुना तक बढ़ चुका है

फास्ट फूड स्टॉल से प्रतिदिन 2000 रुपये का कारोबार

हुस्नआरा खातून ने बताया कि लखपति दीदी योजना के माध्यम से जब एक लाख 15 हजार रुपये की सहायता मिली तो जैसे ठहरी हुई रफ्तार को पंख लग गए. आज वे प्रतिमाह लगभग एक लाख रुपये तक कमा रहीं हैं. वे कहती हैं कि अब उनका कारोबार बारह गुना तक बढ़ चुका है. उनका परिवार सम्मान और आत्मविश्वास के साथ जीवनयापन कर रहा है.

प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं ने हजारों परिवारों की तकदीर बदल दी. आजमगढ़ की ही शशिकला राजभर ने इससे जुड़कर ऋण प्राप्त किया. इससे अदिति फास्ट फूड के नाम से अपना स्टॉल शुरू किया. आज वे प्रतिदिन लगभग 2000 रुपये का कारोबार कर रही हैं. वे पहले रोजगार की तलाश में थी, आज वे दूसरों के लिए प्रेरणा हैं.

लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय लेनदेन

आजमगढ़ की सरोज मौर्या भी इसकी जीवंत तस्वीर हैं. पढ़ाई के साथ वे बीसी सखी के रूप में कार्य कर रहीं हैं और गांवों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचा रही हैं. उनके बताया कि पहले ग्रामीण महिलाएं बैंक जाने से हिचकतीं थीं. अब वे घर के पास ही जमा-निकासी, पेंशन वितरण और डिजिटल भुगतान जैसी सेवाएं पा रहीं हैं.

इस पहल ने महिलाओं को न केवल रोजगार दिया बल्कि उन्हें आर्थिक निर्णयों में सहभागी भी बनाया. बीसी सखियों ने प्रदेश में अब तक लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय लेनदेन किया है और 107 करोड़ रुपये से अधिक का लाभांश अर्जित किया है. यह आंकड़ा बताता है कि महिलाएं अब आर्थिक गतिविधियों की मुख्य धुरी बन चुकी हैं.

नौ लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों का गठन

प्रदेश में नौ लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है. 63,519 ग्राम संगठन और 3272 संकुल स्तरीय संघ सक्रिय हैं जिनसे 99 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं. लखपति महिला योजना के तहत 18 लाख से अधिक महिलाएं लखपति श्रेणी में पहुंच चुकी हैं. यह केवल सरकारी उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रमाण है.

लखपति दीदी योजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को लघु उद्योग और स्वरोजगार शुरू करने के लिए आसान, ब्याज मुक्त और चरणबद्ध पूंजी उपलब्ध कराया जाता है. इससे महिलाओं को छोटे स्तर पर कारोबार शुरू करने में सहायता मिलती है. उत्तर प्रदेश में ‘लखपति दीदी’ योजना महिलाओं को सशक्त बना रही है.