लखनऊ में शंकराचार्य की ‘महासभा’ को सशर्त मंजूरी, प्रशासन ने लगाए ये 16 कड़े नियम
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती वाराणसी से लखनऊ के लिए अपनी पदयात्रा पर हैं. यह यात्रा गौ माता को 'राज्यमाता' का दर्जा दिलाने और गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग को लेकर हैं. इस यात्रा का समापन 11 मार्च को लखनऊ में महासभा के साथ होना है, जिसे अब प्रशासन ने सशर्त मंजूरी दे दी है.
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के ‘गौ माता प्रतिष्ठा संकल्प महासभा’ को लखनऊ पुलिस ने सशर्त अनुमति दे दी है. यह कार्यक्रम 11 मार्च को कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल पर प्रस्तावित है, जहां शंकराचार्य ‘गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ का शंखनाद करेंगे. महासभा के दौरान गौ रक्षा के संकल्प के साथ मांगों का ज्ञापन सौंपा जाएगा.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ माता को ‘राष्ट्रमाता’ या राज्यमाता’ का दर्जा दिलाने, गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को यह अभियान शुरू किया है. उन्होंने वाराणसी के केदार घाट पर 6 मार्च को गऊ रक्षा का संकल्प लेकर यात्रा शुरू की थी. वहीं, लखनऊ में महासभा के लिए प्रशासन ने 16 कड़े नियम लागाए हैं, जिनका उल्लंघन होने पर अनुमति रद्द हो सकती है.
यूपी सरकार को दिए अल्टीमेटम के 40वें महासभा
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी पदयात्रा को धर्मयुद्ध का नाम दिया है. उन्होंने पहले यूपी सरकार को 40 दिनों का अल्टीमेटम दिया था, जिसके बाद यह अभियान शुरू हुआ. यह यात्रा काशी से शुरू हुई, जो जौनपुर, सुल्तानपुर, अमेठी, रायबरेली, उन्नाव जैसे जिलों से होते हुए 11 मार्च को लखनऊ पहुंचेगी. इस दौरान शंकराचार्य कई जगह सभा को संबोधित भी करेंगे.
कार्यक्रम के मुताबित, शंकराचार्य 10 मार्च लखनऊ पहुंचेंगे और 11 मार्च को यह महासभा होगी, जिसमें गौ रक्षा के संकल्प के साथ मांगों का ज्ञापन सौंपा जाएगा. यह आयोजन सनातन आस्था और गौ संरक्षण से जुड़े लाखों श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शर्तों का पालन न होने पर कार्यक्रम रद्द हो सकता है.
लखनऊ प्रशासन ने महासभा को लेकर ये नियम लागाए
- किसी भी धर्म, जाति, संप्रदाय या भाषा के खिलाफ भड़काऊ भाषण पर पूर्ण प्रतिबंध.
- राजनीतिक या धार्मिक व्यक्तियों के खिलाफ विवाद फैलाने वाली टिप्पणियां नहीं.
- नाबालिग बच्चों से विवादित नारे नहीं लगवाए जाएंगे.
- वाहनों की सीमित संख्या में ही एंट्री, पार्किंग से यातायात बाधित नहीं होगा.
- केवल पारंपरिक ध्वज-दंड, कोई घातक वस्तु नहीं.
- ज्ञापन सक्षम अधिकारी को सौंपा जाएगा.
- कोई अप्रिय स्थिति होने पर आयोजकों की पूरी जिम्मेदारी, कानूनी कार्रवाई.
- पुलिस बल का खर्च आयोजकों द्वारा वहन.
- शांत क्षेत्र में लाउडस्पीकर, ढोल-नगाड़े या संगीत प्रतिबंधित.
- यातायात, अग्निशमन नियमों का पालन अनिवार्य.
- ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 (धारा 3(1) और 4(1)) का सख्ती से अनुपालन, उल्लंघन पर पर्यावरण संरक्षण
- अधिनियम 1986 की धारा 15 के तहत दंड.
- किसी भी शर्त के उल्लंघन पर अनुमति स्वतः निरस्त, कार्रवाई शुरू.