गायब होती नाबालिग लड़कियों को लेकर हाईकोर्ट सख्त, कमिश्नर से मांगा जवाब, DCP को भी किया तलब
प्रदेश की राजधानी लखनऊ से गायब होती नाबालिग लड़कियों को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने इस मामले में लड़कियों की बरामदगी को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाया है. साथ ही पुलिस कमिश्नर और डीसीपी से इसको लेकर डिटेल्ड रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी में नाबालिग लड़कियों के लगातार लापता होने के मामलों पर गहरी चिंता जाहिर की है. अदालत ने पुलिस की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया और पूरे शहर में ऐसे मामलों की प्रभावी निगरानी व त्वरित कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए हैं.
न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरी की एकलपीठ ने एक नाबालिग लड़की के पिता की तरफ से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई की. इस दौरान डीसीपी दीक्षा शर्मा व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर हुईं और हलफनामा दाखिल किया. उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र के नौ थानों में 81 महिलाओं व लड़कियों के लापता होने के मामले दर्ज हैं. इनमें से ज्यादातर नाबालिग हैं. 66 नाबालिग लड़कियों को बरामद कर लिया गया है, जबकि 15 अब भी लापता हैं.
कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर जताई नाराजगी
अदालत ने इसपर नाराजगी जाहिर करते हुए टिप्पणी कि वर्तमान मामले में नाबालिग लड़की की बरामदगी केवल न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद ही संभव हो सकी. कोर्ट ने जांच अधिकारी उपनिरीक्षक अश्वनी कुमार राय की कार्यशैली पर भी तीखी नाराजगी जताई और कहा कि उन्होंने न तो उचित जांच की और न ही लड़की की तलाश के लिए गंभीर प्रयास किए.
हाईकोर्ट ने डीसीपी को 3 दिन में डिटेल्ड रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया
हाईकोर्ट ने डीसीपी दीक्षा शर्मा को निर्देश दिया कि वे सभी लापता नाबालिगों के मामलों की समीक्षा करें और तीन दिन के अंदर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें. साथ ही उन मामलों की भी पहचान करें जो पुलिस के संज्ञान में नहीं आए या दर्ज नहीं हुए हैं. अदालत ने लखनऊ पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र सेंगर से पूरे शहर के सभी थानों में लापता नाबालिग लड़कियों के मामलों पर विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा है.
अदालत ने आदेश दिया है कि अगली सुनवाई पर डीसीपी के साथ सभी एसएचओ, सर्किल अधिकारी और जांच अधिकारी भी अदालत में उपस्थित रहें. साथ ही प्रशासन से भविष्य में ऐसे मामलों में अधिक सतर्क, संवेदनशील और सक्षम अधिकारियों की तैनाती करने का निर्देश दिया है.