रोज ₹500 की रंगदारी, फिर दुकान से भगाया… लखनऊ में चाट विक्रेता ने फांसी लगाकर दी जान

लखनऊ में सूदखोरी और अवैध वसूली का एक गंभीर मामला सामने आया है. अमीनाबाद के एक चाट विक्रेता ने सूदखोरों की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली. परिवार का आरोप है कि दबंगों द्वारा लगातार रंगदारी वसूली जा रही थी और मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा था.

लखनऊ में सूदखोरी से परेशान चाट विक्रेता की मौत पर प्रदर्शन

राजधानी लखनऊ से सूदखोरी और कथित अवैध वसूली से जुड़ा एक संवेदनशील मामला सामने आया है. अमीनाबाद के एक चाट विक्रेता ने सूदखोरों की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली. परिवार का आरोप है कि दबंगों द्वारा लगातार रंगदारी वसूली जा रही थी और मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा था. पुलिस ने शिकायत पर मामले की जांच शुरू कर दी है.

जानकारी के मुताबिक, फतेहगंज निवासी अजय अग्रहरी पिछले करीब 30 सालों से अमीनाबाद स्थित लाल खंभा के पास चाट की दुकान लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे. आरोप है कि सूदखोर उनसे रोजाना 500 रुपये की रंगदारी वसूलते थे. लगातार प्रताड़ना और दुकान न लगाने देने से परेशान होकर अजय ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली.

दुकान लगाने से रोका, सामान फेंक दिया

परिवार ने बताया कि अजय ने कुछ पैसे उधार लिए थे, जिन्हें वह किस्तों में चुका रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था. करीब 15 दिन पहले अजय के साथ मारपीट भी की गई थी. उस समय उनके बड़े भाई मुकेश अग्रहरी, जो मनकामेश्वर मंदिर में सेवक हैं, ने 15 हजार रुपये देकर अजय को परेशान न करने की गुहार लगाई थी.

परिवार के मुताबिक, घटना वाले दिन यानी कल जब अजय अपनी दुकान लगाने पहुंचे तो कथित आरोपियों ने उनका सामान फेंक दिया और दुकान लगाने से रोक दिया. इस घटना के बाद अजय मानसिक रूप से टूट गए. अपने परिवार का पालन-पोषण और रोजी-रोटी का संकट सामने देख उन्होंने घर पहुंचकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.

नाका हिंडोला थाने में तहरीर कार्रवाई की मांग

घटना के बाद परिजनों ने नाका हिंडोला थाने में तहरीर देकर कथित सूदखोरों और रंगदारी वसूलने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. पुलिस का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है. जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी. लेकिन इस घटना ने शहर में अवैध वसूली के काले धंधे को उजागर कर दिया है.

यह मामला अमीनाबाद जैसे व्यस्त बाजार में कथित सूदखोरी और अवैध वसूली के आरोपों को लेकर भी कई सवाल खड़े करता है. अब बड़ा सवाल ये है कि आखिर अमीनाबाद जैसे व्यस्त बाजार में अवैध वसूली का ये खेल कब से चल रहा था? क्या स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी पुलिस को नहीं थी? और अगर थी तो पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

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