गंगा एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा कल्कि धाम, 40 किलोमीटर का फोर लेन हाईवे बनेगा

संभल में निर्माणाधीन कल्कि धाम को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए करीब 40 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क बनाने की तैयारी की जा रही है. इस परियोजना का सर्वे शुरू हो चुका है और रिपोर्ट के आधार पर आगे डीपीआर तथा निर्माण प्रक्रिया शुरू होगी. इस सड़क के बनने से देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को कल्कि धाम तक तेज और सुगम पहुंच मिलेगी.

गंगा एक्सप्रेस-वे Image Credit: फाइल फोटो

उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़ने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है. संभल में निर्माणाधीन कल्कि धाम को अब गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है. इसके लिए करीब 40 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क बनाई जाएगी, जिसका सर्वे शुरू हो चुका है. इस परियोजना के पूरा होने के बाद देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को कल्कि धाम पहुंचने में काफी सुविधा मिलेगी.

दरअसल, संभल जिला आने वाले वर्षों में देश के सबसे बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है. यहां निर्माणाधीन कल्कि धाम को लेकर लगातार बड़े विकास कार्य किए जा रहे हैं. अब इसी कड़ी में गंगा एक्सप्रेसवे से कल्कि धाम को जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू हो गया है. सूत्रों के मुताबिक, गंगा एक्सप्रेसवे से कल्कि धाम तक लगभग 40 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क बनाई जाएगी. इस सड़क के लिए सर्वे का काम शुरू हो चुका है.

क्यों अहम है कल्कि धाम?

गंगा एक्सप्रेसवे, उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा और महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे है, जो मेरठ से प्रयागराज तक लगभग 594 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड कॉरिडोर है. यह पश्चिमी, मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश को जोड़ता है. अब सरकार की कोशिश है कि इस एक्सप्रेसवे से धार्मिक स्थलों को भी जोड़ा जाए, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर और तेज कनेक्टिविटी मिल सके. कल्कि धाम को भगवान विष्णु के दसवें अवतार कल्कि की जन्मस्थली से जुड़ी आस्था का केंद्र माना जा रहा है.

कनेक्टिविटी क्यों है जरूरी?

कल्कि धाम में विशाल मंदिर परिसर और धार्मिक-सांस्कृतिक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है. देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने की संभावना को देखते हुए सड़क संपर्क को मजबूत बनाना जरूरी माना गया है. यही वजह है कि गंगा एक्सप्रेसवे से सीधे कनेक्शन की योजना तैयार की गई है. इस परियोजना के तहत बनने वाली फोरलेन सड़क न सिर्फ कल्कि धाम तक पहुंच आसान करेगी बल्कि संभल के ग्रामीण इलाकों को भी नई पहचान देगी.

मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर भी

सड़क बनने के बाद मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों से आने वाले लोगों को लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा. वहीं प्रयागराज और पूर्वांचल की ओर से आने वाले श्रद्धालु भी गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए तेजी से कल्कि धाम पहुंच सकेंगे. साथ ही गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक और लॉजिस्टिक परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है. संभल क्षेत्र में भी इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित करने की योजना है.

सर्वे रिपोर्ट तैयार, DPR का इंतजार

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सर्वे रिपोर्ट तैयार होने के बाद सड़क की अंतिम रूपरेखा तय की जाएगी. इसके बाद भूमि अधिग्रहण, डीपीआर और निर्माण प्रक्रिया शुरू होगी. यूपीडा और संबंधित विभाग इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि कल्कि धाम आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर का धार्मिक पर्यटन केंद्र बन सके.

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