‘कानपुर का नाम कमीशनपुर कर दीजिए…’ नगर निगम के बजट के खेल पर अखिलेश का हमला
कानपुर नगर निगम के बजट आवंटन में भारी पक्षपात का आरोप है. भाजपा के बागी पार्षदों ने 15वें वित्त आयोग निधि के इस्तेमाल पर सवाल उठाए. अखिलेश यादव ने इसे 'कमीशनपुर' कहकर सरकार पर निशाना साधा. आरोपों के बीच सीएम योगी ने मेयर से मुलाकात की. 594 करोड़ के बजट में कई वार्डों को शून्य आवंटन मिला, जबकि कुछ को अत्यधिक.
कानपुर नगर निगम में बजट आवंटन को लेकर भाजपा के बागी पार्षदों के आरोपों के बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सीधा सीएम योगी पर निशाना साधा है. तंज कसते हुए अखिलेश ने कहा कि मुख्यमंत्री जी कानपुर का नाम बदलकर कमीशनपुर कर दीजिए. मामला कानपुर नगर निगम में 15वें वित्त आयोग और निगम निधि से विकास कार्यों के लिए आवंटित बजट से जुड़ा है. बीजेपी के ही कुछ बागी पार्षदों ने आवाज बुलंद की है. इसी बीच सीएम योगी ने कानपुर मेयर से मुलाकात की है.
110 पार्षदों को पिछले साढ़े तीन साल में मिले बजट की सूची सार्वजनिक करते हुए आरोप लगाया है कि आवंटन में भारी पक्षपात हुआ है. करीब 594 करोड़ रुपये के 765 विकास कार्यों के लिए धनराशि आवंटित की गई, लेकिन कई वार्डों को भारी डिमांड के बावजूद बेहद कम राशि मिली. बागी पार्षदों का आरोप है कि कुछ पार्षदों के वार्डों में करोड़ों रुपये के काम प्रस्तावित किए गए. वहीं कई पार्षदों के वार्डों के लिए बजट शून्य बताया गया.
इस वार्ड को मिला सबसे ज्यादा बजट
इस सूची के मुताबिक वार्ड-62 के पार्षद भवानी शंकर राय के लिए सबसे अधिक 14.41 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं. इसके अलावा कई अन्य वार्डों में भी 9 से 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रस्तावित की गई है. वहीं वार्ड-94, 38, 4 और 10 के लिए प्रस्तावित बजट शून्य बताया गया है. भाजपा के बागी पार्षदों का कहना है कि वे पिछले कई महीनों से बजट आवंटन में असमानता और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं.
125 करोड़ के टेंडर पर भी विवाद
विवाद के बीच नगर निगम के करीब 125 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के टेंडर रद्द कर नए सिरे से कराने की तैयारी की जानकारी सामने आई है. इन टेंडरों को अब 16 सितंबर को कराने की बात कही गई है. 594 करोड़ रुपये के कुल 765 कार्यों में से करीब 350 कार्य पूरे होने की जानकारी भी सामने आई है. मामला सामने आने के बाद सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने मुखर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने ‘कमीशनपुर’ वाला तंज कसकर सीधे प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं.