600 नंबर, 16 आवेदकों का इंटरव्यू… राम मंदिर को कल मिल सकता है पहला CEO, तीन नाम फाइनल!

अयोध्या के राम मंदिर को जल्द ही अपना पहला मुख्य कार्यपालक अधिकारी यानी CEO मिल सकता है. CEO चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तीन नामों का पैनल सौंप दिया है. 5,585 आवेदनों से शुरू हुई चयन प्रक्रिया में कई चरणों की स्क्रीनिंग के बाद 108 उम्मीदवार अगले चरण में पहुंचे. इनमें से 17 उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट हुए और 16 का अयोध्या में आमने-सामने इंटरव्यू हुआ. इसके बाद तीन नामों का अंतिम पैनल तैयार किया गया.

सांकेतिक तस्वीर, इमेज सोर्स: AI Image Credit:

अयोध्या के भव्य राम मंदिर के प्रबंधन को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मंदिर के पहले मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) के चयन के लिए बनाई गई सर्च कमेटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है. चयन समिति ने बंद लिफाफे में तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंपा है. अब 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में इन नामों पर चर्चा होगी और इनमें से किसी एक को राम मंदिर का पहला CEO बनाए जाने की घोषणा हो सकती है.

5,585 आवेदन, कई चरणों की छंटनी के बाद 3 नाम

राम मंदिर के CEO के चयन की प्रक्रिया बेहद व्यापक रखी गई थी. ट्रस्ट ने इसके लिए तीन सदस्यीय सर्च कमेटी का गठन किया था. समिति में जस्टिस पी. कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावरे को जिम्मेदारी दी गई थी. चयन समिति के सदस्य जस्टिस पी. कोहली के मुताबिक, आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद 11 से 18 तारीख के बीच कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए. इतने बड़े स्तर पर मिले आवेदनों की स्क्रीनिंग के लिए अलग प्रक्रिया तैयार की गई.

108 उम्मीदवार पहुंचे अगले चरण में

समिति ने पात्रता और अनुभव समेत अलग-अलग मानकों के आधार पर 600 अंकों का मूल्यांकन फॉर्म तैयार किया. 3,577 आवेदकों ने इस प्रक्रिया में हिस्सा लिया. इसके बाद 600 में से निर्धारित अंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों को अगले चरण के लिए चुना गया. स्क्रीनिंग के बाद 108 उम्मीदवार ऐसे पाए गए, जिन्होंने तय मानकों के आधार पर 600 में से 470 या उससे अधिक अंक हासिल किए. इन उम्मीदवारों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इंटरैक्शन किया गया.

अयोध्या धाम में हुआ इंटरव्यू

करीब चार दिन तक चली इस प्रक्रिया के बाद 17 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया. इन सभी को अलग-अलग ग्रेड में भी वर्गीकृत किया गया. इसके बाद अंतिम चरण के लिए 17 उम्मीदवारों को अयोध्या धाम में आमने-सामने बातचीत के लिए बुलाया गया. इनमें से एक उम्मीदवार व्यक्तिगत कारणों से नहीं आ सका, जबकि 16 उम्मीदवारों का दो दिन तक फिजिकल इंटरव्यू लिया गया. इसी प्रक्रिया के बाद समिति ने तीन सबसे उपयुक्त उम्मीदवारों का पैनल तैयार किया.

अब ट्रस्ट करेगा अंतिम फैसला

चयन समिति ने तीन नामों की अंतिम सूची ट्रस्ट को सौंप दी है. अब इनमें से किसे CEO बनाया जाए, इसका फैसला श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट करेगा. ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी ने कहा कि इतने बड़े और विश्व प्रसिद्ध मंदिर के बेहतर प्रबंधन के लिए एक सक्षम CEO की जरूरत महसूस की गई थी. इसी उद्देश्य से विशेषज्ञों की मदद से चयन प्रक्रिया शुरू की गई.

उन्होंने कहा कि चयन समिति ने हजारों आवेदनों की छंटनी और कई चरणों के इंटरव्यू के बाद अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. अब ट्रस्ट की बैठक में रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा. गोविंद देवगिरी ने यह भी कहा कि उनकी अपेक्षा है कि CEO नियुक्त किया जाना चाहिए, लेकिन अंतिम निर्णय न्यास मंडल ही करेगा.

क्यों जरूरी है राम मंदिर का CEO?

राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. मंदिर परिसर के विस्तार, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा, वित्तीय प्रबंधन, निर्माण कार्यों और रोजमर्रा के प्रशासन के लिए एक पेशेवर व्यवस्था की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है. इसी को देखते हुए ट्रस्ट अब एक ऐसे CEO की तलाश में था, जिसके पास बड़े संस्थान के प्रबंधन का अनुभव हो और जो मंदिर से जुड़े प्रशासनिक, वित्तीय और संचालन संबंधी कार्यों को प्रभावी तरीके से संभाल सके.

चयन समिति के सदस्य जस्टिस पी. कोहली ने कहा कि पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी गई. उन्होंने बताया कि अंतिम तीन उम्मीदवारों का चयन उनके अनुभव, विजन, काम करने की क्षमता और संबंधित मुद्दों की समझ को देखते हुए किया गया है.

कल तय हो सकता है राम मंदिर का पहला CEO

अब सभी की नजर 2 सितंबर की ट्रस्ट बैठक पर है. बंद लिफाफे में सौंपे गए तीन नामों पर ट्रस्ट चर्चा करेगा. अगर न्यास मंडल ने CEO नियुक्त करने पर सहमति बना ली, तो बुधवार को ही राम मंदिर के पहले कार्यपालक अधिकारी के नाम का ऐलान हो सकता है. यानी हजारों आवेदनों से शुरू हुई यह लंबी चयन प्रक्रिया अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है.

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