अखिलेश की हिरासत पर यूपी में भड़के सपाई, हजरतगंज से BHU तक गूंजे सरकार विरोधी नारे

छात्र आंदोलन में शामिल होने पर अखिलेश यादव को हिरासत में लिए जाने के विरोध में उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सपा कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया. सपा नेताओं ने सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने और प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली का आरोप लगाया. कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया.

लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान सपा कार्यकर्ता Image Credit: PTI

दिल्ली में छात्रों के आंदोलन में शामिल होने पहुंचे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को हिरासत में लिए जाने के विरोध में मंगलवार को पूरे उत्तर प्रदेश में सपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए. लखनऊ, मुरादाबाद, गोरखपुर और वाराणसी समेत कई जिलों में जोरदार प्रदर्शन हुए. कई जगह पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया.

राजधानी लखनऊ में हजरतगंज चौराहे और विधानसभा के बाहर सपा कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया. वरिष्ठ नेता फाकिर सिद्दीकी, जूही सिंह, प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल, राजपाल कश्यप समेत कई नेता विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए. कार्यकर्ताओं ने ‘गांधी जी लड़े थे गोरों से, हम लड़ेंगे चंदा चोरों से’ जैसे नारे लगाए. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेज दिया. वहीं जनभवन के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी विरोध प्रदर्शन किया.

चित्रकूट विधायक ने इसे ‘काला दिवस’ बताया

मुरादाबाद में सपा नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की. गोरखपुर में शास्त्री चौक पर सपा कार्यकर्ताओं ने सड़क पर लेटकर प्रदर्शन किया. पुलिस से तीखी नोकझोंक के बाद कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया.

औरैया, फिरोजाबाद, गाजीपुर, चित्रकूट, श्रावस्ती, बरेली और वाराणसी में भी सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. वाराणसी में बीएचयू के लंका गेट पर प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया, जबकि चित्रकूट में सदर विधायक अनिल प्रधान ने इसे “काला दिवस” बताते हुए विरोध जताया.

आवाज दबाने के लिए विपक्ष को बनाया निशाना

सपा नेताओं का आरोप है कि छात्रों के मुद्दों और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ उठ रही आवाज को दबाने के लिए विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है. उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना सभी का अधिकार है और सरकार इसे बलपूर्वक दबाने का प्रयास कर रही है.

उधर, पुलिस और प्रशासन का कहना है कि सभी जिलों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए. कई स्थानों पर यातायात कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ, लेकिन बाद में स्थिति सामान्य कर दी गई. हालाकिं, अखिलेश यादव की रिहाई की सूचना मिलने के बाद कई जिलों में सपा कार्यकर्ताओं ने अपना धरना-प्रदर्शन समाप्त कर दिया.

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