‘बिना मुझे बताए बिजली बिल कैसे बढ़ाया’, UPPCL के चेयरमैन पर भड़के मंत्री एके शर्मा

ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के चेयरमैन आशीष गोयल को पत्र लिखकर कई गंभीर मुद्दों पर जवाब मांगा है. मंत्री ने जून 2026 के बिजली बिलों में 10 प्रतिशत एफपीपीएएस लागू किए जाने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस फैसले की जानकारी उन्हें मीडिया के जरिए मिली, जबकि ऐसे निर्णयों की सूचना पहले विभागीय मंत्री को दी जानी चाहिए थी.

यूपी के बिजली मंत्री एके शर्मा (फाइल फोटो) Image Credit:

उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था को लेकर सरकार के भीतर ही बड़ा विवाद सामने आया है. प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी UPPCL के चेयरमैन आशीष गोयल को कड़ा पत्र लिखकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं. मंत्री ने जून 2026 के बिजली बिलों में 10 प्रतिशत एफपीपीएएस शुल्क लगाए जाने पर नाराजगी जताते हुए पूछा है कि आखिर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने का फैसला बिना उन्हें बताए कैसे कर लिया गया?

बिजली मंत्री एके शर्मा ने यहां तक कहा कि विभाग के कई महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी उन्हें टीवी चैनलों और समाचार पत्रों के जरिए मिलती है. मंत्री एके मंत्री ने सवाल उठाया है कि बिजली दरों में प्रभावी बढ़ोतरी जैसे महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी उन्हें पहले क्यों नहीं दी गई? उन्होंने कहा कि इस तरह के निर्णय सीधे आम जनता को प्रभावित करते हैं और सरकार की छवि पर भी असर डालते हैं. इससे यह संदेश जाता है कि विभाग और सरकार के बीच संवाद का अभाव है.

आशीष गोयल की कार्यशैली पर गंभीर सवाल

बिजली मंत्री एके शर्मा ने स्पष्ट किया कि जनता सरकार को जवाबदेह मानती है और ऐसे फैसलों का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव भी पड़ता है, इसलिए महत्वपूर्ण निर्णयों से पहले विभागीय स्तर पर पूरी जानकारी साझा की जानी चाहिए. ऊर्जा मंत्री ने केवल बिजली दरों का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि यूपीपीसीएल चेयरमैन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए हैं. पत्र में उन्होंने मुख्यालय में चेयरमैन की अनुपस्थिति और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का जिक्र किया.

बिजली मंत्री एके शर्मा का कहना है कि अनुभवी अधिकारियों और कर्मचारियों को हटाने से बिजली व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने 2 जून 2026 को UPPCL चेयरमैन आशीष गोयल को विस्तृत पत्र लिखकर कई गंभीर आपत्तियां दर्ज की हैं. सिर्फ FPPAS ही नहीं, बल्कि मंत्री ने कार्यशैली, ट्रांसफर, बिजली संकट और संवादहीनता पर भी सवाल उठाए हैं. बिना जानकारी दिए 10% FPPAS लागू करने पर नाराजगी जताई.

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