महिला आरक्षण का स्वागत, लेकिन सियासत से दूर रहें मुस्लिम बेटियां; ऐसा क्यों बोले मौलाना?
मौलाना शाहबुद्दीन रजवी बरेलवी ने महिला आरक्षण बिल का स्वागत तो किया, लेकिन मुस्लिम महिलाओं को राजनीति से दूर रहने की सलाह दी है. उनका कहना है कि आज की राजनीति छल-कपट और इज्जत उछालने वाली है, जो इस्लाम में महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है. प्रधानमंत्री की पहल सराहनीय है, पर मुस्लिम बेटियों को मौजूदा सियासी माहौल से बचना चाहिए.
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शाहबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मुस्लिम महिलाओं को सियासत से दूर रहने की सलाह दी है. उन्होंने केंद्र सरकार के महिला आरक्षण बिल (‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023) में संशोधन का स्वागत तो किया, लेकिन कहा कि आज की राजनीति काफी बदल गई है. ऐसे माहौल में मुस्लिम महिलाओं को राजनीति से दूर ही रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आधी आबादी को बराबरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं. उनकी ओर से यह एक अच्छी पहल है.
एक वीडियो बयान जारी करते हुए मौलाना रजवी ने कहा कि पीएम मोदी चाहते हैं कि 2029 में होने वाले लोकसभा चुनावों में अधिक महिलाएं चुनी जाएं. संसद में उनकी उपस्थिति बढ़े. ऐसे में बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं ने सवाल किया है कि इतना अच्छा मौका मिल रहा है तो उन्हें सियासत में जाना चाहिए कि नहीं. इसके जवाब में मौलाना रजवी ने कहा कि कल की सियासत कुछ और थी और आज की की कुछ और. आज सियासत में छल-कपट का जाल है.
इसलिए दी दूरी बनाने की सलाह
मौलाना रजवी ने कहा कि आज की सियासत दलदल जमीन की तरह है. यहां महिलाओं को इज्जत को उछाला जा रहा है. इसी के साथ सियासत में बेपर्दागी भी लाजमी हो गई है. जबकि इस्लाम में महिलाओं को घर की जीनत माना गया है. इसलिए इस्लाम उन्हें उनकी रक्षा, सुरक्षा और सम्मान के लिए सियासत में जाने से रोकता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि आज की सियासत मुस्लिम महिलाओं के लिए नहीं है. इसलिए उन्हें इससे दूर ही रहना चाहिए.
33 फीसदी मिलेगी हिस्सेदारी
मौलाना रजवी ने कहा कि महिला आरक्षण बिल में संशोधन एक सराहनीय पहल है. इससे महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिल सकेगा. देश और समाज की व्यवस्था में उन्हें वाजिब हक मिलेगा और इस आरक्षण से वह चुनाव लड़कर देश की नीति नियंता बन सकेंगी. इस आरक्षण का कोई भी महिला फायदा उठा सकती है, चुनाव लड़ सकती है और सियासी मैदान में उतर सकती है. बावजूद इसके, मुस्लिम महिलाओं के लिए यह नहीं है. उन्हें तो सियासत से दूर ही रहना चाहिए.