नोएडा बवाल में साजिश का संकेत, 18-20 साल के लड़कों पर क्यों उठ रहे सवाल?

नोएडा में श्रमिकों के आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा को लेकर पुलिस जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. पुलिस का कहना है कि उपद्रव में शामिल बड़ी संख्या में युवक कम उम्र के थे. वीडियो फुटेज में 18 से 20 साल के लड़के पत्थरबाजी और उपद्रव करते नजर आ रहे हैं.अधिकारियों का मानना है कि यह युवक या तो भीड़ के साथ बह गए या फिर किसी के उकसावे में आकर हिंसा का हिस्सा बन गए हैं.

नोएडा हिंसा

नोएडा शहर में मजदूरों के उग्र प्रदर्शन और उसके बाद भड़की हिंसा को लेकर लगातार खुलासे हो रहे हैं. प्रशासन का कहना है हिंसा भड़काने के पीछे सुनियोजित साजिश हो सकती है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हिंसा में शामिल कई युवक 18 से 20 साल की उम्र के थे, जो यहीं के फैक्ट्रीज में काम करते हैं.

नोएडा हजारों युवाओं को रोजगार देने वाला बड़ा औद्योगिक केंद्र है. देश के अलग-अलग हिस्सों से आए युवाओं को यहां नौकरी मिली है. लेकिन हालिया घटनाओं में यही युवा सड़कों पर उतरकर हिंसा करते हुए नजर आए. शुरुआत मजदूरों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन से हुई थी, लेकिन कुछ ही समय में यह आंदोलन उग्र हो गया और कई जगह पथराव तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आई.

18-20 साल के युवाओं की भूमिका पर सवाल

पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि उपद्रव में शामिल बड़ी संख्या में युवक कम उम्र के थे. वीडियो फुटेज में 18 से 20 साल के लड़के पत्थरबाजी और उपद्रव करते नजर आए.अधिकारियों का मानना है कि यह युवक या तो भीड़ के साथ बह गए या फिर किसी के उकसावे में आकर हिंसा का हिस्सा बन गए है.

पुलिस कमिश्नर ने क्या कहा?

पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के मुताबिक जिले में 83 अलग-अलग स्थान पर करीब 42000 श्रमिकों ने प्रदर्शन किया. हालांकि पुलिस और प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 78 स्थान पर लोगों को समझकर शांतिपूर्ण तरीके से वापस भेज दिया. लेकिन कुछ जगहों पर स्थिति बिगड़ गई और हिंसा की घटनाएं सामने आई.

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में हाई लेवल बैठक

घटना के बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया. ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित कमेटी की अहम बैठक हुई. इसमें मजदूरों की समस्याओं पर चर्चा की गई, बैठक में वेतन, ओवरटाइम, साप्ताहिक अवकाश और कार्य स्थल की स्थितियों जैसे मुद्दों पर बात हुई. अधिकारियों ने बताया कि मजदूरों की 5 मांगों में 4 मांगें मान ली गई है. बाकी मांगों के लिए हाई लेवल कमेटी बनाई गई है, जिसकी बैठक भी हो चुकी है.

हिंसा के बाद पुलिस ने सोमवार रात में 30 लोगों को हिरासत में लिया, जबकि 60 लोग पहले से ही हिरासत में थे. इसके अलावा, 200 लोगों की पहचान हुई है. इनमें वे लोग शामिल हैं जो पथराव, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं में शामिल थे. इसके अलावा कई अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है. पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज और सीसीटीवी के आधार पर आगे की कार्रवाई जारी रहेगी.

सोशल मीडिया के दो अकाउंट पर एफआईआर

पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी जी ने यह भी बताया कि मामले में दो सोशल मीडिया अकाउंट्स पर एफआईआर दर्ज की गई है. उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर फैलाई गई गलत जानकारी ने भीड़ को भड़काने में बड़ी भूमिका निभाई. पुलिस अब उन सभी अकाउंट की जांच कर रही है जिनके जरिए अफवाह फैलाई गई है.

जांच में यह भी सामने आया है कि इस प्रदर्शन में कुछ लोग अन्य जिलों से भी आए थे जिन्होंने माहौल को जानबूझकर भड़काने की कोशिश की उनका यह भी कहना है कि यह पूरा मामला एक सोची समझी साजिश का हिस्सा भी हो सकता है. कुछ ऐसे सबूत मिले हैं जो इस बात को इशारा करते हैं कि प्रदूषण को हिंसक बनाने की योजना पहले से बनाई गई थी. इन सभी संदिग्धों को चिन्हित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है.

नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने पूरे घटनाक्रम पर सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि कानून तोड़ने वाले को किसी भी हालत में बख्सा नहीं जाएगा. कई लोग को हिरासत में लिया गया है और कार्रवाई जारी है.अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होगी. साथ ही उन्होंने खुद विभिन्न इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया. अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए गए हैं.

श्रमिकों से शांति बनाए रखने की अपील

पुलिस और प्रशासन ने श्रमिकों से शांति बनाए रखने की अपील की है. साथ ही किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न देने को कहा है. कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने भरोसा दिलाया है कि मजदूरों की समस्याओं का समाधान बातचीत के जारी किया जाएगा. लेकिन हिंसा किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. नोएडा में यह बवाल अब कई एंगल से जांच के दायरे में है. कम उम्र के युवा की भूमिका, सोशल मीडिया की भड़काऊ पोस्ट और संभावित साजिश के संकेत के एंगल पर जांच की जा रही है.

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