लड़कियों की कॉल, गेम खेलने का न्योता… नोएडा में गेमिंग ऐप के जरिए ऐसे बना रहे थे शिकार

ग्रेटर नोएडा में ऑनलाइन गेमिंग ऐप से ठगी के गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. पुलिस ने इस गिरोह के 8 सदस्यों को गिरफ्तार किया है. यह गिरोह मुख्य रूप से बच्चों और युवाओं को टार्गेट करता था. फिलहाल, पुलिस पैसे के पूरे नेटवर्क को ट्रेस कर रही है.अब तक जांच में करीब 10 खातों को फ्रिज कराया गया है.

नोएडा में गेमिंग एप के जरिए ठगी

ग्रेटर नोएडा एक बार फिर ऑनलाइन ठगी और सट्टेबाजी के नेटवर्क को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है. इस बार ठगों ने लोगों को लूटने के लिए न तो फर्जी बैंक अधिकारी बनने का सहारा लिया और न ही केवाईसी अपडेट जैसे पुराने हथकंडे. इस बार ठगों ने चमकदार और आकर्षक नाम वाले गेमिंग ऐप MAZABOOK Maze Se Jeeto को ही ठगी का हथियार बना लिया.

बिसरख पुलिस की कार्रवाई में सामने आया है कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं बल्कि पूरी तरह प्रोफेशनल तरीके से चलाया जा रहा एक फर्जी कॉल सेंटर और ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क था. यह पिछले छह महीनों से सक्रिय था और सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका था.

गौर सिटी सेंटर बना ठगी का हब

बिसरख पुलिस को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि गौर सिटी सेंटर के कुछ ऑफिसों से संदिग्ध गतिविधियां संचालित हो रही हैं. गोपनीय सूचना के आधार पर पुलिस ने जब गौर सिटी सेंटर के OC-39 और OC-40 में छापा मारा, तो अंदर का नज़ारा चौंकाने वाला था. बाहर से देखने पर यह एक आईटी कंपनी या स्टार्ट-अप जैसा ऑफिस लग रहा था लेकिन अंदर दर्जनों मोबाइल फोन, लैपटॉप, सैकड़ों सिम कार्ड, क्यूआर कोड स्कैनर और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन से जुड़े दस्तावेज मौजूद थे.

यहां से TRENTRAC INNOVATIVE SOLUTIONS के नाम पर फर्जी कंपनी चल रही थी. इसके जरिए MAZABOOK- Maze Se Jeeto नाम का गेमिंग ऐप ऑपरेट किया जा रहा था. पुलिस ने मौके से पांच युवतियों समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया. साथ ही भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण बरामद किए.

कैसे काम करता था Maze Se Jeeto ठगी मॉडल

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह ऐप देखने में एक सामान्य गेमिंग प्लेटफॉर्म लगता था,जिसमें क्रिकेट, कसीनो, एविएटर, रोलेट और नंबरिंग जैसे गेम उपलब्ध थे. शुरुआत में यूज़र को छोटे अमाउंट पर खेलने दिया जाता था और जानबूझकर उन्हें जीत भी दिलाई जाती थी. जैसे ही यूज़र का भरोसा बन जाता उसे ज्यादा पैसे लगाने के लिए उकसाया जाता. युवतियों को खासतौर पर इसलिए रखा गया था ताकि वे फोन कॉल और चैट के जरिए यूज़र्स को मानसिक रूप से प्रभावित कर सकें.

युवतियां मीठी बातों, भरोसे और आज तो जीत पक्की है जैसे वाक्यों से लोगों को लगातार पैसे लगाने के लिए प्रेरित करती थीं. जब यूज़र बड़ी रकम हारने लगता या जीत की रकम निकालने की मांग करता तो उसे यह कहकर टाल दिया जाता कि अभी मिनिमम अमाउंट पूरा नहीं हुआ या अकाउंट वेरिफिकेशन चल रहा है आखिरकार एक समय ऐसा आता था जब यूज़र का अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाता था. फिर कॉल और मैसेज का जवाब मिलना बंद हो जाता था.

बच्चे और युवा सबसे बन रहे थे आसान शिकार

इस गिरोह का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इसके निशाने पर सबसे ज्यादा बच्चे और युवा थे. पुलिस के अनुसार ऐप को इस तरह डिजाइन किया गया था कि वह कम उम्र के यूज़र्स को आकर्षित करे. रंग-बिराफ ग्राफिक्स,जल्दी पैसा जीतने का लालच और सोशल मीडिया के जरिए प्रचार इन सबने बच्चों को जुए की लत में धकेल दिया.कई मामलों में सामने आया है कि स्कूल-कॉलेज के छात्र अपनी रोज़ मिलने वाली पॉकेट मनी,ऑनलाइन पेमेंट ऐप्स से इस गेम में लगा रहे थे.यह सिर्फ ठगी नहीं बल्कि बच्चों का भविष्य खराब करने वाला अपराध है.

कौन हैं आरोपी?

डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया की गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी अच्छा-खासा पढ़े-लिखे हैं. इनमें से कुछ ने ग्रेजुएशन और कुछ ने पोस्ट-ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की है. कॉल सेंटर में काम करने वाली युवतियों को 25 से 40 हजार रुपये महीना सैलरी दी जा रही थी. जबकि टेक्निकल और अकाउंट संभालने वालों की कमाई इससे कहीं ज्यादा थी.
सरगना दिव्यांग सोनल उर्फ अनिरुद्ध इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. वही ऐप की टेक्निकल मैनेजमेंट फाइनेंशियल फ्लो और बैंकिंग चैनल संभालता था.पुलिस को शक है कि इसके पीछे एक अलग फाइनेंशियल नेटवर्क भी सक्रिय है. फिलहाल, इसकी जांच की जा रही है. इस कॉल सेंटर में काम करने वाले अधिकतर को पता था कि वह लोगों के साथ फ्रॉड या ठगी कर रहे हैं.

बैंकिंग नेटवर्क और मनी ट्रेल की जांच में जुटी पुलिस

अनिरुद्ध बाकायदा नौकरी पर रखने वाले युवक और युवतियों को विशेष ट्रेनिंग देता था ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने जाल में फसाया जा सके और किसी को शक भी ना हो. जांच में यह भी सामने आया है कि ठगी की रकम सीधे किसी एक खाते में नहीं जाती थी. इसके लिए दर्जनों अकाउंट्स,फर्जी सिम कार्ड और क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया गया. कुछ रकम क्रिप्टो और डिजिटल वॉलेट के जरिए भी इधर-उधर की गई. डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया की यह एक संगठित साइबर अपराध है.हमने प्राथमिक गिरफ्तारी कर ली है लेकिन असली चुनौती पैसे के पूरे नेटवर्क को ट्रेस करना है. बैंक खातों,पेमेंट गेटवे और ऐप के बैको की गहन जांच की जा रही है.अब तक जांच में करीब 10 खातों को फ्रिज कराया गया है इनमें करीब करोड़ों रुपए की ट्रांजैक्शन भी पाई गई है.

अभिभावकों और समाज के लिए चेतावनी

इस मामले में पुलिस का कहना है कि यह मामला सिर्फ पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं है बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है. मोबाइल फोन और इंटरनेट की आसान पहुंच ने बच्चों को ऐसे खतरनाक प्लेटफॉर्म तक पहुंचा दिया है,जहां वे बिना समझे-बूझे जुए की लत में फंस रहे हैं. नोएडा-ग्रेटर नोएडा में यह पहली घटना नहीं है. इससे पहले भी ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी से जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं लेकिन यह मामला इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि इसमें बच्चों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया. अब जिम्मेदारी उन अभिभावकों की भी होती है जो अपने बच्चों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं.

गेम की लत ने ले ली ना जाने कितनी जिंदगियां

इस गेम की लत ने न जाने कितने लोगों की जिंदगियां बर्बाद कर दी हैं कई बार ऐसा देखा गया है कि लोगों ने अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया और वह जिंदगी से भी हाथ धो बैठे. उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गेम की लत ने न जाने कितने मासूम की जान ले ली.