ईरान-अमेरिका की जंग से 4000 KM दूर नोएडा पर क्या पड़ेगा असर? उद्योगपतियों ने बताया

गौतबुद्धनगर उत्तर प्रदेश का औद्योगिक हब कहलाता है. यहां तकरीबन 18 हजार औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं. नोएडा में 10 हजार तो ग्रेटर नोएडा में 8 हजार यूनिट्स एक्टिव हैं. इन औद्योगिक इकाइयों के संचालकों का कहना है कि ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल के युद्ध से उनकी इंडस्ट्री बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है.

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अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ चल रहे युद्ध का असर नोएडा और ग्रेटर नोएडा पर भी पड़ सकता है. यहां तकरीबन 18 हजार औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं. मिडिल ईस्ट में चल रहे महायुद्ध के चलते इन उद्योगों का संचालन प्रभावित होने की आशंका जाहिर की जा रही है. इन उद्योगों के संचालकों के मुताबिक युद्ध का सीधा असर सप्लाई चेन, कच्चे माल की कीमतों और लॉजिस्टिक्स पर पड़ेगा. इसका असर भी दिखने लगा है. बीते दिनों में कई रॉ मटेरियल के रेट 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं.

‘हालात ऐसे रहे तो कस्टमर्स का डिमांड पूरा करना मुश्किल’

गौतबुद्धनगर उत्तर प्रदेश का औद्योगिक हब कहलाता है. यहां तकरीबन 18 हजार औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं. नोएडा में 10 हजार तो ग्रेटर नोएडा में 08 हजार यूनिट्स एक्टिव हैं. लंबे समय से हाई क्लास क्रोकरी प्रिंटिंग इंक और प्रिंटर्स के आयात-निर्यात का बिजनेस करने वाले राजीव वर्मा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं. अगर हालात ऐसे रहे तो समय पर रॉ मैटेरियल नहीं मिलेगा. विदेशी के साथ-साथ देसी ग्राहकों के डिमांड को भी पूरा करना मुश्किल हो जाएगा.

‘शिपिंग चार्ज बढ़ने से आयात-निर्यात होगा महंगा’

वायर प्रोडक्ट इंडस्ट्री से जुड़े विशाल गोयल का कहना है कि उनका ज्यादातर कच्चा माल विदेश से आता है. रॉ मैटेरियल पहले ही 20 से 30 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है. युद्ध के चलते शिपिंग चार्ज बढ़ा तो लागत और बढ़ेगी. पहले कम रेट पर लिए गए ऑर्डर अब उद्योगपतियों के लिए घाटे का सौदा बन सकते हैं. युद्ध का असर समुद्र के रास्ते आने जाने वाले माल पर भी पड़ा है. अगर युद्ध लंबा खिंच तो शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम बढ़ सकता है. इससे निर्यात और आयात दोनों महंगे हो सकते हैं.

‘युद्ध के चलते रोजगार पर भी आएगा संकट’

इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रोडक्ट्स का बिजनेस करने वाला एक अन्य उद्योगपति हीरा सिंह बिष्ट का कहना है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा की 18000 इकाइयों में बड़ी संख्या में श्रमिक और कर्मचारी कार्यरत हैं. उत्पादन घटता है तो इसका असर रोजगार पर भी पड़ सकता है. अगर युद्ध लंबा चला तो आने वाले समय में कीमतों में वृद्धि और उत्पादन में कमी देखी जा सकती है. अगर समय पर डिमांड पूरा नहीं हुआ तो खरीदार दूसरे विकल्प चला सकते हैं. इसका सीधा असर इंडस्ट्री से जुड़े लोगों और श्रमिकों पर पड़ेगा.