नोएडा के इस नामी स्कूल की मान्यता रद्द, यहां पढ़ रहे छात्रों का अब क्या होगा?

नोएडा के सेक्टर 56 स्थित उत्तराखंड पब्लिक स्कूल की 9वीं से 12वीं कक्षा तक की मान्यता सीबीएसई ने रद्द कर दी है. सीबीएसई के इस फैसले से 400 छात्रों के भविष्य को लेकर शंका उत्पन्न हो गई. हालांकि, प्रशासन की तरफ से आश्वासन दिया गया है कि छात्रों के भविष्य पर असर नहीं पड़ेगा.

नोएडा के उत्तराखंड पब्लिक स्कूल पर बड़ी कार्रवाई

नोएडा के सेक्टर 56 में एक उत्तराखंड पब्लिक स्कूल है. अब सीबीएसई ने इस स्कूल की कक्षा 9 वीं से लेकर 12वीं तक की मान्यता को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है. सीबीएसई के इस फैसले से अभिभावकों और छात्रों में हलचल मच गई है. सीबीएसई ने यह सख्त फैसला शिक्षकों की तरफ से लगाए गए वेतन कटौती, उत्पीड़न और महिला शिक्षकों के साथ कथित शोषण के आरोपों की जांच के बाद लिया है.

400 छात्रों के भविष्य को लेकर अभिभावक चिंतित

सीबीएसई के इस फैसले से 400 छात्रों के भविष्य को लेकर शंका उत्पन्न हो गई. अब इस मामले में जिला प्रशासन और नोएडा प्राधिकरण मैं एक अहम फैसला लेते हुए कहा है कि बच्चों की जो परीक्षाएं चल रही है, उनको बाधित नहीं किया जाएगा. डीआईओएस राजेश कुमार सिंह ने बताया है की बच्चों को दूसरे स्कूल में शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है.

डीआईओएस राजेश कुमार सिंह ने आगे कहा कि जिन 10वीं और 12वीं के छात्रों की बोर्ड परीक्षा चल रही है उन्हें परीक्षा देने की पूरी अनुमति है. उनका सत्र प्रभावित नहीं होगा. साथ ही नवीन और 11वीं के छात्रों को 31 मार्च 2026 तक आसपास के अन्य सीबीएसई स्कूलों में शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है.

क्या है पूरा मामला, क्यों रद्द की गई मान्यता?

पिछले साल कई शिक्षकों ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए थे. उनका कहना था कि उन्हें बैंक खाते में वेतन देने के बाद उसका एक हिस्सा नगद वापस करने के लिए दबाव बनाया जाता है. महिला शिक्षकों का आरोप था कि स्कूल का माहौल असुरक्षित और तनातनी वाला था. विरोध करने पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया जाता था.

शिक्षकों के कई आरोप सही पाए गए थे

शिक्षकों ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी से की थी. डीएम के आदेश पर सिटी मजिस्ट्रेट और जिला विद्यालय निरीक्षक की संयुक्त जांच कराई गई थी. जांच रिपोर्ट में कई आरोप सही पाए गए थे. रिपोर्ट के मुताबिक विद्यालय पर शिक्षकों के करीब 91 लाख रुपए बकाया थे. इनमें से 68 लाख रुपये लौटा दिए गए थे. शेष राशि अभी भी लंबित है.

हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीएसई ने की थी जांच

प्रशासन ने यह भी पाया कि वेतन का हिस्सा नगद के तौर पर वापस लेने के शिक्षकों के आरोप में दम है. इसको लेकर शिकायतकर्ताओं ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. हाई कोर्ट ने सीबीएसई को जांच कर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया था. सीबीएसई ने स्वतंत्र जांच कर 18 फरवरी को आदेश जारी करते हुए 9 वीं से 12वीं तक की मान्यता रद्द कर दी.

प्राधिकरण और प्रशासन की आगे की क्या है रणनीति

जिला प्रशासन एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने की तैयारी में है. यह अधिकारी छात्रों के भविष्य को देखते हुए उनको स्कूलों में प्रवेश दिलाने में मदद करेगा. प्राधिकरण और प्रशासन का कहना है कि छात्रों का शैक्षणिक नुकसान नहीं होने दिया जाएगा और वैकल्पिक व्यवस्था समय रहते पूरी कर ली जाएगी. अधिकारी ने यह भी बताया कि कक्षा 8 तक की पढ़ाई पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है. इन कक्षाओं के छात्रों की पढ़ाई जारी रहेगी.

स्कूल की भविष्य को लेकर प्रशासन ने क्या कहा?

प्रशासन ने कहा कि स्कूल की भविष्य को लेकर अंतिम निर्णय सीबीएसई और जिला प्रशासन की अगली समीक्षा बैठक के बाद लिया जाएगा. स्कूल को नए एडमिशन लेने पर पूरी तरह से फिलहाल रोक लगा दिया गया है. छोटी कक्षाओं के छात्रों को 9 वीं और 11वीं में प्रमोट करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है.