PM सूर्य घर योजना में बड़ा खेल, मृतक के नाम पर लगे सोलर पैनल; लाखों की सब्सिडी हड़पी
बरेली में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. एक निजी वेंडर फर्म ने मृत लोगों और गैर-आवेदकों के नाम पर सोलर पैनल लगाकर लाखों की सरकारी सब्सिडी हड़प ली. जांच के बाद वेंडर समेत के 8 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
बरेली में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में एक बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है. आरोप है कि एक निजी वेंडर फर्म ने मृत लोगों और ऐसे लोगों के नाम पर भी सोलर पैनल दिखा दिए, जिन्होंने कभी इस योजना के लिए आवेदन ही नहीं किया था. जांच में मामला खुलने के बाद फर्म संचालक समेत 8 लोगों के खिलाफ कैंट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है.
यूपीनेडा (उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण) के वरिष्ठ लिपिक रघुवर दयाल की शिकायत पर सनराइज इंटरप्राइजेज के संचालक आशु गुप्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. विभागीय जांच में पता चला कि फर्म द्वारा लगाए गए 29 सोलर कनेक्शनों की जांच की गई, जिनमें से आठ कनेक्शनों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं.
लाभार्थियों को 1.08 लाख की मिलती है सब्सिडी
योजना के तहत अधिकृत वेंडर ही आवेदन से लेकर दस्तावेजों की प्रक्रिया और सोलर सिस्टम लगाने तक का काम करते हैं. आरोप है कि जिन लोगों के नाम पर कनेक्शन दिखाए गए, उनमें कई लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि कुछ ने योजना के लिए आवेदन ही नहीं किया था. इसके बावजूद उनके नाम पर सोलर पैनल लगने का रिकॉर्ड तैयार कर दिया गया.
प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत सोलर पैनल लगाने वाले पात्र लाभार्थियों को अधिकतम 1.08 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिलती है. इसमें 78 हजार केंद्र और 30 हजार राज्य सरकार से मिलता है. अधिकारियों के अनुसार, जिन 8 फर्जी कनेक्शनों का पता चला है, उनमें केंद्र की सब्सिडी जारी हो चुकी थी, जबकि राज्य सरकार की राशि अभी जारी नहीं हुई थी.
बैंक सहयोग के रकम निकालना आसान नहीं
जांच में आशंका जताई गई है कि फर्जी दस्तावेज, मोबाइल नंबर और बैंक खातों का इस्तेमाल कर सब्सिडी की रकम निकाल ली गई. यह भी जांच का विषय है कि मृत लोगों के सक्रिय बैंक खातों का उपयोग किया गया या फिर किसी अन्य तरीके से बैंकिंग प्रक्रिया में हेराफेरी की गई. क्योंकि बिना बैंक स्तर पर सहयोग के इस तरह रकम निकालना आसान नहीं.
यूपीनेडा के परियोजना अधिकारी रामजनम यादव ने बताया कि मामले में विस्तृत जांच की जा रही है. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि फर्जी दस्तावेज, बैंक खाते और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर सरकारी धन कैसे निकाला गया. उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है, जांच में किसी बैंक कर्मचारी या अन्य की भूमिका सामने आती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी.