प्रयागराज में गंगा-यमुना बचाओ मुहिम, नगर निगम में गूंजा ‘कॉकरोच’ प्रोटेस्ट; 15 दिन का दिया अल्टीमेटम
प्रयागराज में गंगा-यमुना प्रदूषण के खिलाफ 'कॉकरोच' प्रदर्शन किया गया. पर्यावरण कार्यकर्ता दीपक शर्मा ने सीवर के जहरीले पानी से नदियों और करोड़ों लोगों की आस्था को खतरा बताया. साथ ही जल निगम और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया.
प्रयागराज में गंगा और यमुना में बढ़ते प्रदूषण को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद हुई है. पर्यावरण कार्यकर्ता दीपक शर्मा ने नदियों में गिर रहे सीवर के जहरीले पानी के विरोध में नगर निगम में प्रतीकात्मक ‘कॉकरोच प्रोटेस्ट’ किया. उनका आरोप है कि जिम्मेदार विभागों की लापरवाही से करोड़ों लोगों की आस्था और नदी का अस्तित्व दोनों खतरे में पड़ गए हैं.
दीपक शर्मा का कहना है कि वृंदावन से लेकर प्रयागराज संगम तक कई नालों का गंदा और बिना शोधन वाला पानी सीधे गंगा और यमुना में छोड़ा जा रहा है. उन्होंने उत्तर प्रदेश जल निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रशासनिक अधिकारियों पर जिम्मेदारियों के निर्वहन में विफल रहने का आरोप लगाया है. साथ ही अधिकारियों को 15 दिन की चेतावनी दी.
15 दिनों में 100% बायो-टैपिंग पर कार्रवाई की मांग
पर्यावरण कार्यकर्ता दीपक शर्मा के मुताबिक, इस प्रदूषण का असर सिर्फ नदियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जलीय जीव-जंतु, पर्यावरण और संगम में स्नान करने आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था भी प्रभावित हो रही है. उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है.
दीपक शर्मा ने प्रशासन को 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए मांग की है कि सभी नालों की 100 प्रतिशत बायो-टैपिंग सुनिश्चित की जाए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि अगर मांगें पूरी नहीं हुई तो इस आंदोलन को इलाहाबाद हाईकोर्ट और राज्य स्तर तक विस्तारित किया जाएगा.
गंगा और यमुना की स्वच्छता को लेकर उठी यह नई मुहिम अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती नजर आ रही है. सवाल यह है कि क्या 15 दिनों के भीतर जिम्मेदार विभाग कोई ठोस कदम उठाएंगे या फिर यह आंदोलन और बड़ा रूप लेगा. हालांकि, इस संबंध में संबंधित विभागों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है.
