Ground Report: क्या राम मंदिर में चढ़ावा घोटाले के आरोपों के बाद कम हुआ श्रद्धालुओं का दान?

राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गबन के आरोपों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस विवाद का असर श्रद्धालुओं की आस्था और दान पर पड़ा है? क्या श्रद्धालु अब दान देने से बच रहे हैं, या फिर पहले की तरह रामलला के चरणों में श्रद्धा अर्पित कर रहे हैं? TV9 ने अयोध्या पहुंचकर इसकी जमीनी पड़ताल की.

राम मंदिर (फाइल फोटो) Image Credit:

अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में गबन के आरोपों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या श्रद्धालुओं का विश्वास दान के प्रति बरकरार रहेगा या इस प्रकरण के बाद दानदाताओं के उत्साह में कमी आएगी? कई बड़े दानदाताओं ने ट्रस्ट और कर्मचारियों पर लगे आरोपों के बाद खुल कर अपनी बात रखी है और सामने का कर आरोप भी लगाएं हैं.

श्रद्धालुओं में किसी ने दो सौ चांदी की ईंट दी लेकिन रसीद नहीं मिली. किसी ने हार और पादुकाएं दी लेकिन कोई रसीद नहीं. ऐसे मामले अब सामने आने लगे हैं. लेकिन इस बीच आम श्रद्धालुओं के बीच क्या भाव है? क्या श्रद्धालु काउंटर या डिजिटल चढ़ावा की ओर जा रहे हैं? या गर्भ गृह और आसपास रखें दान पात्र से परहेज कर रहे हैं. जानिए इस इस रिपोर्ट में…

दान काउंटर खाली, श्रद्धालु नहीं दिखें

राम मंदिर परिसर में प्रवेश और निकास दोनों स्थानों पर दान काउंटर बनाए गए हैं, जहां श्रद्धालु नकद या अन्य माध्यम से दान कर सकते हैं. काउंटर पर दान देने की प्रक्रिया पूरी तरह रिकॉर्ड होती है. श्रद्धालु का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज किया जाता है, कंप्यूटर में एंट्री होती है, मोबाइल पर मैसेज भेजा जाता है और रसीद भी दी जाती है. साथ ही प्रसाद भी मिलता है.

लेकिन ग्राउंड पर तस्वीर कुछ अलग दिखाई दी. दान काउंटरों पर श्रद्धालुओं की संख्या बेहद कम नजर आई. यात्री सुविधा केंद्र के भीतर श्रद्धालुओं की भीड़, बैठने की जगह भरी हुई थी. लेकिन दान काउंटर पर श्रद्धालु नहीं पहुंच रहे हैं. प्रवेश और निकास दोनों स्थानों पर बने दान पात्र और काउंटर खाली दिखाई दिये. दान पात्र में श्रद्धालु पैसे डालते इन दो जगहों पर नहीं दिखे.

क्या विवाद का असर पड़ा?

मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं से बातचीत में मिला-जुला रुख सामने आया. महाराष्ट्र से आए एक परिवार ने कहा कि उनकी आस्था भगवान राम में है, किसी विवाद से उनकी श्रद्धा प्रभावित नहीं होगी. उनका कहना था कि जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी. निकास द्वार पर एक श्रद्धालु ने कहा ‘हमने तो अपनी श्रद्धा से दान दिया, जो गलत करेगा भगवान देखें.’

वहीं, कुछ श्रद्धालुओं ने माना कि इस तरह के आरोपों से लोगों के मन में सवाल जरूर उठते हैं, लेकिन उन्हें भरोसा है कि सरकार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी. एक श्रद्धालु ने कहा कि जो हुआ है वो तो बहुत गलत हुआ है. भगवान पर विश्वास पूरा है इसलिए पहले की तरह दान पात्र में ही दान किया है, क्योंकि उनका विश्वास किसी व्यक्ति विशेष में नहीं हैं.

भरोसे पर सवाल, लेकिन आस्था बरकरार

जमीनी पड़ताल में यह जरूर सामने आया कि आम श्रद्धालुओं के भरोसे पर सवाल उठे हैं, लेकिन उनकी आस्था अभी भी रामलला में कायम है. दान काउंटरों पर भीड़ भले कम हो, लेकिन अधिकांश श्रद्धालु पारंपरिक तरीके से दान पात्र में ही अपनी श्रद्धा अर्पित कर रहे हैं. फिलहाल दान में बड़ी गिरावट के ठोस संकेत नहीं मिले हैं.

मंदिर से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, जून महीने में गर्मी के कारण श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कम जरूर है, लेकिन इसका असर दान पर विशेष रूप से नहीं देखा गया है. सूत्रों का दावा है कि जून में प्रतिदिन औसतन 15 से 20 लाख रुपये तक का चढ़ावा मंदिर को प्राप्त हो रहा है.

रिपोर्ट, अभिजीत ठाकुर, टीवी9

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