चंपत राय के अलावा जिन दो सदस्यों की राम मंदिर में सबसे ज्यादा चलती थी, वो कौन हैं?
राम मंदिर में चढ़ावे और दानराशि विवाद के बीच ट्रस्ट के भीतर प्रभावशाली चेहरों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है. महासचिव चंपत राय के अलावा डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को ट्रस्ट की 'पावर ट्रायो' का हिस्सा माना जाता रहा है. डॉ. अनिल मिश्रा स्थानीय संत समाज, प्रशासन और मंदिर व्यवस्थाओं के प्रमुख सूत्रधार रहे हैं, जबकि गोपाल राव निर्माण और संचालन तंत्र के अहम समन्वयक माने जाते हैं. एसआईटी इन दोनों से पूछताछ कर चुकी है.
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दानराशि को लेकर उठे विवाद के बीच अब लोगों की दिलचस्पी सिर्फ जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी चर्चा में है कि ट्रस्ट के भीतर वास्तविक प्रभाव किन लोगों का रहा है. औपचारिक तौर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सामूहिक निर्णय लेने वाली संस्था है, लेकिन महासचिव चंपत राय के अलावा दो ऐसे नाम रहे, जिनकी पकड़ सबसे मजबूत मानी जाती थी, वो हैं डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव.
अयोध्या के डॉक्टर से ट्रस्ट के सबसे प्रभावशाली स्थानीय चेहरे तक
अयोध्या निवासी डॉ. अनिल मिश्रा पेशे से होम्योपैथिक चिकित्सक रहे हैं. करीब चार दशक तक उन्होंने चिकित्सा सेवा के साथ-साथ राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े लोगों के बीच सक्रिय भूमिका निभाई. विश्व हिंदू परिषद, स्थानीय संत समाज और आंदोलनकारियों के बीच समन्वय स्थापित करने वाले प्रमुख चेहरों में उनका नाम लिया जाता रहा है. जब केंद्र सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया, तब डॉ. अनिल मिश्रा को स्थायी सदस्य बनाया गया.
प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य यजमान बने
ट्रस्ट में उनकी भूमिका केवल औपचारिक सदस्य की नहीं रही, बल्कि उन्हें अयोध्या की स्थानीय परिस्थितियों, संत समाज, प्रशासनिक तंत्र और मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं की गहरी समझ रखने वाले व्यक्ति के रूप में देखा जाता रहा. 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान डॉ. अनिल मिश्रा और उनकी पत्नी उषा मिश्रा को मुख्य यजमान बनाया गया था. शास्त्रों के अनुसार किसी बड़े वैदिक अनुष्ठान में गृहस्थ दंपति का मुख्य यजमान होना आवश्यक माना जाता है.
एसआईटी ने क्यों की पूछताछ?
16 जनवरी से शुरू हुए सात दिवसीय अनुष्ठानों में उन्होंने संकल्प से लेकर पूजा-विधि तक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. अयोध्या के स्थानीय सूत्रों का दावा है कि मंदिर में दानपात्रों से प्राप्त नकदी की प्रक्रिया और उससे जुड़ी कई व्यवस्थाओं की जानकारी रखने वालों में डॉ. अनिल मिश्रा प्रमुख रहे हैं. इसी वजह से दानराशि विवाद सामने आने के बाद एसआईटी उनसे पूछताछ कर रही है. जानकारी के मुताबिक, उनसे कई राउंड पूछताछ की गई है.
पर्दे के पीछे का प्रभावशाली चेहरा
अगर डॉ. अनिल मिश्रा ट्रस्ट का स्थानीय चेहरा माने जाते थे, तो गोपाल राव को मंदिर निर्माण और व्यवस्थागत संचालन का सबसे भरोसेमंद व्यक्ति माना जाता रहा है. दक्षिण भारत से जुड़े संगठनात्मक पृष्ठभूमि वाले गोपाल राव का नाम आम श्रद्धालुओं के बीच भले ज्यादा चर्चित न हो, लेकिन मंदिर निर्माण परियोजना से जुड़े लोगों के बीच उन्हें बेहद प्रभावशाली माना जाता रहा है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता के रूप में उनकी पहचान रही है.
निर्माण और प्रबंधन की जिम्मेदारी
गोपाल राव की भूमिका मंदिर निर्माण एजेंसियों और ट्रस्ट के बीच समन्वय स्थापित करने की रही. निर्माण सामग्री, तकनीकी निगरानी, कार्यों की प्रगति और व्यवस्थागत संचालन में उनकी सक्रिय भागीदारी बताई जाती रही है. राम मंदिर निर्माण में करोड़ों रुपये की सामग्री, तकनीकी प्रक्रियाएं और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल स्थापित करना बड़ी चुनौती थी. ऐसे में गोपाल राव को फैसलों को अमलीजामा पहनाने वाले प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में देखा गया.
जांच के दायरे में क्यों?
दानराशि विवाद के बाद मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं और संचालन तंत्र की भी समीक्षा शुरू हुई. चूंकि गोपाल राव व्यवस्थापक की भूमिका में माने जाते रहे हैं, इसलिए एसआईटी उनसे भी पूछताछ कर रही है.
चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव: ट्रस्ट की ‘पावर ट्रायो’
अयोध्या के जानकारों का कहना है कि ट्रस्ट की निर्णय प्रक्रिया भले सामूहिक हो, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर लंबे समय तक तीन लोगों का प्रभाव सबसे अधिक दिखाई देता रहा. इसमें पहले चंपत राय हैं, जो संगठन, प्रशासन और ट्रस्ट का सार्वजनिक चेहरा हैं. दूसरे डॉ. अनिल मिश्रा, जो स्थानीय नेटवर्क, संत समाज और व्यवस्थाओं के प्रमुख सूत्रधार हैं. तीसरा गोपाल राव, जो निर्माण परियोजना और संचालन तंत्र के प्रभावशाली समन्वयक हैं.
इसी कारण मंदिर से जुड़े अधिकांश बड़े फैसलों, व्यवस्थाओं और अब विवादों में भी इन तीनों के नाम प्रमुखता से सामने आते रहे हैं. राम मंदिर में दानराशि से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी गठित की है. यह टीम पूरे प्रकरण की जांच कर रही है और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है. फिलहाल यह स्पष्ट करना जरूरी है कि डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव से पूछताछ हो चुकी है.