दायीं किडनी थी खराब, निकाल दी बायीं वाली, तड़प-तड़पकर मर गया मरीज, अब डॉक्टर देगा 2 करोड़ रुपये

साल 2012 में एक महिला डॉक्टर राजीव लोचन के पास पहुंची. जांच में उसे दाहिनी किडनी में समस्या निकल कर सामने आई. लेकिन डॉक्टर राजीव लोचन ने खराब दाहिनी किडनी को छोड़ दिया, बाईं किडनी, जो सही स्थिति में थी, उसे निकाल दिया. इस चूक के चलते महिला ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया. अब 12 साल बाद राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने इसे घोर लापरवाही का मामला माना है. आयोग डॉक्टर द्वारा मृतक के परिवार को दो करोड़ रुपये देने का आदेश दिया है.

ऑपरेशव ( प्रतीकात्मक तस्वीर) Image Credit:

साल 2012 में एक महिला को पेट दर्द की शिकायत लेकर राजीव लोचन नाम के एक डॉक्टर के पास पहुंची. जांच के बाद यह सामने आया कि उसकी दाहिनी किडनी में गंभीर समस्या है. वहीं, बाईं किडनी पूरी तरह सही है. लेकिन इसके बाद डॉक्टर की लापरवाही का जो नमूना सामने आया, उसने सबको हिला दिया.

डॉक्टर राजीव लोचन ने खराब दाहिनी किडनी को छोड़ दिया. फिर बाईं किडनी, जो सही स्थिति में थी, उसे निकाल दी. इस चूक ने महिला को मौत की स्थिति में पहुंचा दिया. उसने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया. अब 12 साल बाद राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने इसे घोर लापरवाही का मामला माना है. आयोग डॉक्टर द्वारा मृतक के परिवार को दो करोड़ रुपये देने का आदेश दिया है.

दो साल तक तड़पती रही महिला

गलत ऑपरेशन के बाद महिला की तबीयत बिगड़ती चली गई. दोबारा सीटी स्कैन कराने पर पता चला, डॉक्टर ने उसकी गलत किडनी निकाल दी है. महिला तकरीबन दो साल तक डायलिसिस पर रही. परिवार इलाज के लिए अस्पताल में चक्कर लगाता रहा. साल 2014 में महिला ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया. आयोग ने अपने आदेश में कहा कि अगर महिला के शरीर में स्वस्थ बाईं किडनी रहती तो वह लंबे समय तक जिंदा रह सकती है. यह एक बहुत बड़ा मेडिकल डिजास्टर है.

डॉक्टर के रजिस्ट्रेशन को दो साल के लिए किया गया था सस्पेंड

मामले की जांच उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की तरफ से भी की गई थी. दोनों ही संस्थाओं की जांच में भी डॉक्टर दोषी पाया गया. उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल की तरफ से डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन दो साल के लिए सस्पेंड कर दिया गया था. इस दौरान डॉक्टर की तरफ से एक फर्जी केस शीट भी पेश की गई थी, जो पकड़ में आ गई थी.

आयोग ने दिया दो करोड़ रुपये का मुआवजे का आदेश

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने डॉक्टर को परिवार को 2 करोड़ रुपये देने का आदेश दिया. आयोग ने 1.5 करोड़ रुपये मेडिकल लापरवाही के लिए मुआवजे के रूप में देने को कहा है. इसके अलावा परिवार के सदस्यों को दुख और प्रताड़ना के लिए 10-10 लाख रुपये देने का निर्देश दिया गया. इसके तहत 1 लाख रुपये कानूनी खर्च के तौर पर भी देने होंगे. यह राशि तीन महीने के भीतर चुकानी होगी. अगर डॉक्टर ऐसा नहीं तो 20 फरवरी 2014 से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा. यह बाद में बढ़कर 9 प्रतिशत हो जाएगा.

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