आंबेडकर जयंती और सहारनपुर… PM मोदी ने एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के लिए आज का दिन और जगह क्यों चुना?

प्रधानमंत्री मोदी ने आंबेडकर जयंती पर दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर का उद्घाटन सहारनपुर से किया. यह कदम उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए दलित वोट बैंक को साधने की बीजेपी की रणनीति का हिस्सा है. पश्चिमी यूपी में दलित मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं, और 2024 के अनुभवों से सीखकर भाजपा 2027 के लिए विकास और सामाजिक समरसता के जरिए उन्हें जोड़ने का प्रयास कर रही है.

सहारनपुर में पीएम मोदी Image Credit:

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. इस चुनाव को देखते हुए प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर दलित वोट बैंक केंद्र में है. उत्तर प्रदेश की चुनावी व्यवस्था में लगभग 20-21 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला इस दलित वोट बैंक को रिझाने के लिए सभी दल कसरत कर रहे हैं. इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल यानी डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन कर बड़ा संदेश दे दिया है.

इसी के साथ सहारनपुर-देहरादून में आयोजित पीएम मोदी के कार्यक्रमों को विकास के साथ-साथ राजनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देहरादून से इस कॉरिडोर को राष्ट्र को समर्पित किया. इस दौरान सहारनपुर में रोड शो के दौरान भारी भीड़ उमड़ी. इसे व्यापक जनसमर्थन भी मिला. सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस कॉरिडोर के शुरू होने से सहारनपुर से दिल्ली और देहरादून की दूरी घटकर करीब ढाई घंटे रह जाएगी. इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में व्यापार, निवेश और पर्यटन को नई गति मिलेगी.

टारगेट पर दलित वोट बैंक

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ और बागपत जैसे जिलों की कई विधानसभा सीटों, जैसे पुरकाजी, रामपुर मनिहारान और सहारनपुर देहात आदि में दलित मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं. बिजनौर क्षेत्र की नगीना लोकसभा सीट पर भी इस वर्ग का प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है. 21% मतदाता होने के चलते उत्तर प्रदेश की दर्जनों विधानसभा सीटें ऐसी है जहां पर दलित मतदाता निर्णायक भूमिका में है. 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी राजनीतिक दल इस वोट बैंक पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.

सामाजिक संदेश और संगठनात्मक सक्रियता

भारतीय जनता पार्टी का फोकस 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी दलित मतदाताओं पर पूरा फोकस कर रही है. दलित मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए तमाम जुगत लगाई जा रही है. इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए कहा कि सरकार रविदास, महर्षि वाल्मीकि और बाबा साहेब आंबेडकर जैसे महापुरुषों की प्रतिमाओं पर छत्र स्थापित कराएगी. उन्होंने कहा कि भाजपा के कार्यकर्ता नियमित रूप से इन प्रतिमाओं और स्मारकों की साफ-सफाई करेंगे, जिससे समाज में सम्मान और जुड़ाव की भावना मजबूत होगी.

2024 से सबक लेकर 2027 की तैयारी

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के “संविधान बचाओ” नारे को दलित मतदाताओं का व्यापक समर्थन मिला. जिससे समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन को लाभ हुआ. वहीं बहुजन समाज पार्टी गठबंधन से बाहर रहने के कारण अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी. ऐसे में अब विकास परियोजनाओं, सामाजिक प्रतीकों और जनसंपर्क के जरिए दलित मतदाताओं के बीच पकड़ मजबूत करने की कोशिशें तेज हो गई हैं. कुल मिलाकर, दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर जहां विकास का प्रतीक है, वहीं इसके साथ जुड़े कार्यक्रम पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति के बदलते समीकरणों की ओर भी संकेत कर रहे हैं.

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