शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को पुलिस जांच पर भरोसा नहीं, शिकायतकर्ता से मिलीभगत का लगाया आरोप
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि पुलिस शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी से हर जानकारी साझा कर रही है, जिसका खुलासा व्हाट्सएप चैट से हुआ है. शंकराचार्य ने साथ ही कहा कि राम मंदिर के लिए हमारे गुरू और हमने लड़ाई लड़ी.
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक बार फिर से पुलिस जांच पर सवाल उठाए हैं. विद्या मठ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शंकराचार्य ने दस्तावेज के साथ ये आरोप लगाया कि जो मुकदमा मेरे ख़िलाफ हुआ है उस मुकदमे की हो रही जांच पर मैं कैसे भरोसा करूं? पुलिस हर जानकारी मुझ पर आरोप लगाने वाले के साथ शेयर कर रही है.
शंकराचार्य ने कहा कि एक वाट्सएप ग्रुप से इसका खुलासा हुआ है. इसमें 87 लोग शामिल हैं जिनको आशुतोष ब्रह्मचारी पुलिस से मिली जानकारी शेयर कर रहा है. इसलिए मुझे पुलिस से कोई उम्मीद नहीं है. अब ऐसा लग रहा है कि उत्तर प्रदेश में अपराधी राज करते हुए दिख रहे हैं यहां तक कि जांच में भी उनकी भूमिका होती है ये बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण हैं.
‘अब केवल ईश्वरीय न्याय पर ही विश्वास है’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वैसे तो हर सरकार में हमारे साथ कुछ ना कुछ हुआ लेकिन देर सबेर सभी ने हमारी बात सुनी. सिर्फ बीजेपी की ही सरकार ऐसी रही जिसने ना तो हमारी बात सुनी और जब हम कुछ कहना चाहें तो उसको कुचलने का प्रयास भी किया. उन्होंने यहां तक कहा कि सरकार हमारे चारों मठ गिरा दें उससे कोई फर्क नही पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि गऊ रक्षा का हमारा अभियान जारी रहेगा. हम अगर धर्म के पथ पर रहेंगे तो सनातनी हमको ऐसे 18 मठ बनवा देंगे. अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राम जन्मभूमि की लड़ाई पर भी बात की. उनका कहना है कि जिस विद्या मठ और मठ से जुड़े शंकराचार्यों ने इसकी लड़ाई लड़ी आज उसी की भूमिका और चरित्र पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं, ये शर्मनाक है.
राम मंदिर के लिए हमारे गुरू और हमने लड़ाई लड़ी
शंकराचार्य ने कहा कि जब रामजन्मभूमि में पक्षकार बनना था तब सरकार में बैठे हुए लोग सड़क पर माहौल बना रहे थे. वो पक्षकार नहीं बने क्योंकि उनको भरोसा नहीं था कि कोर्ट से फ़ैसला आ सकता है. कोर्ट में हमारे गुरू और हमने लड़ाई लड़ी. 19 दिन तक लगातार हमारी गवाही हुई और हमारी ही गवाही पर मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ.
उन्होंने कहा कि कलक्टर एडवर्ड द्वारा लगवाए गए 158 पत्थर जो अयोध्या तीर्थ अंवेषण समिति की अनुशंसा पर 18 वीं सदी में लगवाए थे और जिस जर्मन विद्वान हेन्स बेकर ने अयोध्या की शास्त्रीय चौहद्दी निर्धारित की थी. ये दोनों डॉक्यूमेंट मैंने अपने वकील पीएन मिश्र के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट की फुल बेंच को उपलब्ध कराए थे. उसी एविडेंस पर हमारे पक्ष में फ़ैसला आया.