स्मार्टफोन नहीं, केवल टैबलेट देगी योगी सरकार, निरस्त होगा कैबिनेट का पुराना फैसला; क्या है वजह?

स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के तहत छात्रों को अब स्मार्ट फोन के बजाय टैबलेट बांटा जाएगा. योगी सरकार जल्द ही कैबिनेट के पुराने फैसले को निरस्त कर सकती है. डिजिटल पढ़ाई पर ज्यादा फोकस की वजह से सरकार ने अब बच्चों को टैबलेट देने का निर्णय लिया है.

स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना (प्रतीकात्मक फोटो) Image Credit:

उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है. इस योजना के तहत अभी तक छात्रों को स्मार्टफोन-टैबलेट दिए जा रहे थे, लेकिन अब सरकार ने स्मार्टफोन देने के बजाय केवल टैबलेट देने का फैसला किया है. सरकार का मानना है कि पढ़ाई के लिए टैबलेट का इस्तेमाल स्मार्ट फोन की अपेक्षा बेहतर है. इस बदलाव को लागू करने के लिए योगी सरकार जल्द ही कैबिनेट के पुराने फैसले को निरस्त कर सकती है.

अधिकारियों के मुताबिक टैबलेट्स शैक्षिक उद्देश्यों के लिए स्मार्टफोन की तुलना में ज्यादा प्रभावी हैं. टैबलेट की बड़ी स्क्रीन और बेहतर प्रोसेसिंग क्षमता होती है. ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई ई-लर्निंग सामग्री और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ज्यादा कारगर साबित होता है. कोविड-19 महामारी के बाद डिजिटल शिक्षा के बढ़ते महत्व को देखते हुए सरकार का यह कदम युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में काफी अहम है.

खरीदे जाने थे 25 लाख स्मार्टफोन

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने बच्चों को बांटने के लिए पहले 25 लाख स्मार्टफोन खरीदने की योजना बनाई थी. इसके लिए 2493 करोड़ रुपये के बजट मंजूर भी कर लिया गया था. हालांकि, अब नए फैसले के बाद सरकार ने पुराने फैसले को रद्द करने का निर्णय लिया है. अधिकारियों के मुताबिक अब स्मार्ट फोन नहीं बांटे जाएंगे. .

कैबिनेट में जल्द किया जाएगा पेश

इसका नया प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट में पेश किया जाएगा, इसमें टैबलेट बांटने की प्रक्रिया, बजट, और पात्रता मानदंडों को साफ किया जाना है. सरकार का लक्ष्य 2025-26 के वित्तीय वर्ष में 15 लाख स्मार्टफोन और 10 लाख टैबलेट बांटना है. इसके लिए 4000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है.

2021 में सीएम योगी ने शुरू की थी ये योजना

उत्तर प्रदेश की फ्री टैबलेट स्मार्टफोन योजना को 19 अगस्त 2021 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुरू किया था. इसके जरिए युवाओं को डिजिटल संसाधनों के इस्तेमाल की सुविधा ले सकेंगे. यह योजना ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन, टेक्निकल, और डिप्लोमा कोर्स करने वाले स्टूडेंट्स के लिए है, इसके तहत लगभग 1 करोड़ युवाओं को फायदा देने का लक्ष्य रखा गया है. टैबलेट्स में प्री-लोडेड शैक्षिक सामग्री होगी, जो गांव के इलाकों में छात्रों को इंटरनेट के बिना भी पढ़ाई करने में मदद करेगी.

योजना का लाभ लेने के लिए छात्रों को अपने कॉलेज या विश्वविद्यालय के जरिए अप्लाई करना होगा. हाल ही में डुप्लीकेसी रोकने के लिए सरकार ने ई-केवाईसी को अनिवार्य कर दिया है. इसे डिजिशक्ति पोर्टल पर “मेरी पहचान” पोर्टल के जरिए पूरा किया जा सकता है. छात्र अब खुद ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. ऐसे में इस योजना का फायदा लेने में देरी नहीं होगी. डेटा सत्यापन के बाद स्टूडेंट्स को उनके टैबलेट की स्थिति के बारे में मैसेज के जरिए अपडेट मिलेगा.

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