बिल्डरों की लूट पर ब्रेक…अब परिवार के सदस्य को 1000 तो बाहरी व्यक्ति के नाम पर सिर्फ 25,000 रुपये में फ्लैट हो सकेगा ट्रांसफर
यूपी में फ्लैट आवंटी की मृत्यु होने पर या फिर किसी अन्य स्थिति में वारिस जब फ्लैट ट्रांसफर की प्रक्रिया अपनाते थे तो बिल्डल उनसे इसके लिए 200 रुपये से लेकर 1000 रुपये वर्ग फीट तक वसूलते थे. यह रकम लाखों रुपये में पहुंच जाती थी. इसको लेकर लगातार शिकायतें मिलने के बाद अब यूपी रेरा ने बड़ा फैसला किया है. अब परिवार के सदस्य को सिर्फ 1000 रुपये के शूल्क और बाहरी व्यक्ति को 25000 रुपये की फीस में फ्लैट का हस्तांतरण किया जा सकेगा.
अब तक प्रदेश में वारिस या फिर किसी बाहरी व्यक्ति के नाम पर फ्लैट ट्रांसफर करने के लिए बिल्डर की तरफ से मोटी रकम वसूली जाती थी. लेकिन अब रेरा इसको लेकर एक सख्त फैसला किया है. इस फैसले के बाद अब रक्त संबंधों में फ्लैट ट्रांसफर के लिए महज एक हजार रुपये का शुल्क लगेगा. इसके अलावा अगर आप किसी बाहरी व्यक्ति के नाम पर फ्लैट ट्रांसफर करते हैं तो आपसे 25000 रुपये से ज्यादा शुल्क नहीं लिया जा सकेगा.
यूपी रेरा के 10 साल पूरे होने के मौके पर चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने बताया कि फ्लैट आवंटी की मृत्यु होने पर जब वारिस फ्लैट ट्रांसफर की प्रक्रिया अपनाते थे तो बिल्डल उनसे ट्रांसफर के नाम पर 200 रुपये से लेकर 1000 रुपये वर्ग फीट तक वसूलते थे. यह रकम बढ़कर काफी ज्यादा हो जाती थी. किसी-किसी परिस्थिति में ये 25 से 30 लाख रुपये तक पहुंच जाती थी. इसको लेकर यूपी रेरा के पास लगातार शिकायतें भी आ रही थी.
अब वारिस को 1000 रुपये के शूल्क में फ्लैट किया जा सकेगा ट्रांसफर
यूपी रेरा के मुताबिक जब आवंटी की तरफ से फ्लैट की रकम चुका दी गई है तो अतिरिक्त शुल्क लेना अवैध है. ऐसे में रेरा की तरफ से ये फैसला लिया गया है. आवंटी की मृत्यु पर उत्तराधिकारी यदि परिवार का सदस्य है तो प्रमोटर अधिकतम 1000 की प्रोसेसिंग फीस ले सकता है. इसके लिए वारिस को केवल त्यु प्रमाण पत्र, सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र तथा अन्य विधिक वारिसों से अनापत्ति प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक डॉक्यूमेंट देने होंगे.
बाहरी व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर के लिए लगेगा 25000 का शूल्क
अगर फ्लैट का आवंटन परिवार के सदस्य के इतर किसी अन्य व्यक्ति के पक्ष में होता है तो तो प्रमोटर अधिकतम 25000 रुपये प्रोसेसिंग फीस ले सकता है.रेरा ने ऐसे मामलों में नया विक्रय या लीज का अनुबंध नहीं करने का निर्देश दिया है. रेरा का ये फैसला लाखों परिवारों के लिए राहत लेकर आया है, जो इस वजह से संपत्ति ट्रांसफर नहीं करवा पा रहे थे क्योंकि बिल्डर उनसे अधिक फीस वसूलते हैं.