आंधी-तूफान में जान गंवाने वालों को कितना मुआवजा, क्या उजड़ा घर भी बनाकर देती है सरकार?

उत्तर प्रदेश में आंधी-तूफान और बिजली गिरने से बीते 24 घंटे में 111 लोगों की मौत जबकि 72 घायल हुए हैं. वहीं, 170 पशुहानि और 227 मकान क्षति की सूचना है. सीएम योगी ने पीड़ित परिवारों को सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं. जानें प्राकृतिक आपदा में सरकार कितना मुआवजा देती है.

आंधी-तूफान में जान गंवाने वालों को कितना मिलता है मुआवजा? Image Credit:

उत्तर प्रदेश में बेमौसम आंधी-तूफान, तेज बारिश और बिजली गिरने की घटनाएं अक्सर तबाही मचा देती हैं. ऐसे आपदाओं में जान गंवाने वाले परिवारों को राज्य सरकार तुरंत राहत पहुंचाती है. आंधी-तूफान में जान गंवाने वालों को सरकार 4 लाख रुपये मुआवजा देती है. वहीं, पक्के और कच्चे घर के पूर्ण रूप से उजड़ने पर वित्तीय सहायता भी मिलती है.

प्राकृतिक आपदाओं में मौत होने पर 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाती है. घर उजड़ने पर वित्तीय सहायता दी जाती है, लेकिन नया घर नहीं बनाया जाता. पक्के घर के लिए 1.20 लाख तक और कच्चे घर के लिए 15,000-65,000 मिलते हैं. यह राशि DBT के माध्यम से सीधे खाते में आती है, जो आपदा राहत के तहत मुख्य रूप से नकद सहायता पर केंद्रित है.

कुछ विशेष मामलों में PMAY-G के तहत घर

हालिया घटनाओं में जब आंधी-बारिश से दर्जनों मौतें हुईं, तब सीएम योगी ने स्पष्ट रूप से 4 लाख रुपये प्रति मृतक घोषित किए. घायलों को भी चिकित्सा सहायता और उचित राहत दी जाती है. पूरी तरह क्षतिग्रस्त घर के लिए SDRF/NDRF मानदंडों के अनुसार वित्तीय सहायता मिलती है. पक्का और कच्चा घर को नुकसान के आधार पर मरम्मत की राशि मिलती है.

आंशिक क्षति कम से कम 15% पर भी कुछ सहायता मिल सकती है. जिला अधिकारियों द्वारा सर्वे के बाद DBT से राशि खाते में भेजी जाती है. यह वित्तीय सहायता है, जिसका उपयोग पीड़ित परिवार मरम्मत या पुनर्निर्माण के लिए कर सकता है. हालांकि, कुछ विशेष मामलों में अन्य योजनाओं (जैसे PMAY-G) के तहत पीड़ितों को अतिरिक्त मदद मिल सकती है.

24 घंटे में सर्वे कराकर मुआवजा देने के निर्देश

वहीं, पशुहानि, फसल क्षति और अन्य नुकसान पर भी अलग-अलग मानदंडों से राहत दी जाती है. यूपी में आंधी-तूफान और बिजली गिरने से बीते 24 घंटे में 111 लोगों की मौत जबकि 72 घायल हुए हैं. वहीं, 170 पशुहानि और 227 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं. सीएम योगी संबंधित विभागों को 24 घंटे के भीतर नुकसान का सर्वे कराकर शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं.

राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने बताया कि कंट्रोल रूम को हाई एलर्ट पर रखते हुए प्रभावित परिवारों को दी जा रही सहायता राशि की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गये हैं. राहत आपदा हेल्प लाइन नम्बर 1070 पर सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. मुख्यमंत्री ने प्रभारी मंत्रियों को राहत कार्यों की समीक्षा और राहत वितरण कराने के निर्देश दिए हैं.

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