न नई नौकरी निकल रही और न कर्मचारियों के ट्रांसफर हो रहे हैं…. आखिर UP में क्या चल रहा है?

उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों और तबादलों में अचानक रुकावट आई है. मई 2025 में स्वीकृत तबादला नीति के बावजूद, कई विभागों में तबादले नहीं हो पाए हैं, जिससे कर्मचारियों में असंतोष है. नई भर्तियों की अधिसूचनाओं में भी देरी हो रही है, जिससे बेरोजगार युवाओं में चिंता बढ़ रही है.

यूपी में तबादला नीति में देरी Image Credit:

उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों और कर्मचारियों के तबादलों को लेकर एक अजीब सा सन्नाटा छाया हुआ है. जहां एक तरफ बेरोजगार युवा नई भर्तियों की अधिसूचनाओं का इंतजार कर रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ विभागों में तबादला नीति में गड़बड़ी के कारण सरकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर को रोक दिया गया है. ऐसे में सवाल है कि आखिर यूपी में क्या चल रहा है? क्यों रुकी हुई है भर्ती और तबादलों की प्रक्रिया?

दरअसल, यूपी सरकार ने मई 2025 में तबादला नीति को मंजूरी दी थी. इसके तहत समूह ‘क’ और ‘ख’ के अधिकतम 20% अधिकारियों और समूह ‘ग’ व ‘घ’ के 10% कर्मियों का तबादला होना था. अतिरिक्त तबादलों के लिए विभागीय मंत्री का अनुमोदन जरूरी था. नीति के अनुसार, 15 जून 2025 तक तबादले पूरे होने थे, जिसमें तीन साल से अधिक समय से एक ही जगह तैनात कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जानी थी. कट-ऑफ तिथि 31 मार्च 2025 तय की गई.

स्वास्थ्य विभाग में एक भी तबादले नहीं हुए

जून में शुरू हुए तबादले में कई विभागों पर सवाल उठने लगे कहीं मंत्री प्रमुख सचिव की नहीं सुन रहा था. तो कहीं प्रमुख सचिव की मंत्री नहीं सुना रहे थे. जिसके कारण आधा दर्जन से ज्यादा विभागों में स्थानांतरण नहीं हो पाया और सवालों के घेरे में रहा. प्रदेश के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने अपने विभाग को प्रमुख सचिव को निर्देश देते हुए कहा कि बगैर मेरे अनुमति के या पत्रावली मेरे संज्ञान में लिए कोई भी स्थानांतरण ना किया जाए.

फिर थोड़े दिन के बाद उन्होंने तबादला शून्य घोषित कर दिया. यानी स्वास्थ्य विभाग में एक भी तबादले नहीं हुए. इसके बाद सबसे ज्यादा चर्चा स्टांप पंजीयन विभाग की हुई. जहां पर आईजी स्टांप और पंजीयन विभाग के मंत्री रविंद्र जायसवाल के बीच विवाद शुरू हुआ. विभागीय मंत्री ने आईजी स्टांप पर भ्रष्टाचार और लेनदेन का आरोप लगाते हुए सवाल खड़े किए. जिसके बाद 210 तबादला को निरस्त कर दिए गए.

वन विभाग में भी तबादला शून्य घोषित कर दिया गया

इसके अलावा तबादला में कथित अनियमितता के लिए IG समीर वर्मा को हटा दिया गया. पूरे मामले के लिए विभागीय मंत्री ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जांच की मांग की. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पीडब्ल्यूडी विभाग का जिम्मेदारी है. पीडब्ल्यूडी में करीब 500 इंजीनियर से लेकर बाबू तक स्थानांतरण होने थे. फाइल भी बन गई थी कुछ लोगों के स्थानांतरण हो गए लेकिन किसी की नई जगह जॉइनिंग नहीं हो पाई. यानी वहां भी स्थानांतरण रोक दिया गया.

वन विभाग में भी तबादला शून्य घोषित कर दिया गया. पढ़ाई लिखाई वाले विभाग यानी बेसिक शिक्षा विभाग में भी इस बार बीएसए से लेकर के बाबू तक करीब 300  तबादला वाले होने थे. लेकिन इस विभाग में भी तबादला जीरो रहा. वन विभाग और  आयुष विभाग विभाग में  सैकड़ों तबादले होने थे लेकिन अधिकारियो और कर्मचारियों को निराशा हाथ लगी. हालांकि, कुछ अधिकारी और कर्मचारी खुश भी है जो हस्तांतरण नहीं करना चाहते थे.

नई नौकरियों का इंतजार: बेरोजगार युवाओं की बेचैनी

यूपी में बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है. हाल ही में  समाजवादी पार्टी ने सोशल मीडिया हैंडल पर दावा किया कि प्रदेश में “भयंकर बेरोजगारी” है और पढ़े-लिखे युवा नौकरी के लिए सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. हालांकि, कुछ भर्तियों की घोषणाएं हुई हैं. जैसे यूपी पुलिस में कांस्टेबल और सब इंस्पेक्टर के 19,000 से अधिक पदों पर भर्ती की अधिसूचना जल्द जारी होने की बात कही जा रही है.

इसके अलावा, अध्यापक के 1 लाख से अधिक खाली पद और लेखपाल भर्ती की अभी प्रक्रिया नहीं शुरू हो पाई हैं. साथ ही जिन विभागों में स्थानांतरण नहीं किया गया है, वहां भी हज़ारों की संख्या में पद रिक्त चल रहे हैं. बेरोजगार युवाओं की शिकायत है कि भर्ती प्रक्रियाएं या तो बार-बार टल रही हैं या रद्द हो जाती है. हालांकि पुलिस भर्ती रद्द होने के बाद परीक्षा फिर से कराई गई. यूपी उत्तर प्रदेश संघ लोकसेवा से होने वाली भर्ती या तो रद्द हुई या विवादों के कारण स्थगित हैं. 

Follow Us