प्रधान ही होंगे अपने गांव के प्रशासक! शासन को भेजा गया प्रस्ताव, CM लेंगे फैसला
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है. पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने घोषणा की है कि कार्यकाल खत्म होने के बाद ग्राम प्रधान ही गांव के प्रशासक बनेंगे. इस संबंध में प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है, जिस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अंतिम फैसला लेंगे. यह कदम गांवों में विकास कार्य जारी रखने के लिए उठाया गया है.
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने वाला है. इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार में पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बड़ी घोषणा कर दी है. उन्होंने कहा कि कार्यकाल खत्म होने के बाद भी गांव में विकास की डोर ग्राम प्रधानों के पास ही रहेगी. कार्यकाल खत्म होने के बाद ग्राम प्रधान अपने गांव के प्रशासक बन जाएंगे. उन्होंने कहा कि इस संबंध में पंचायती राज विभाग से प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है. दो-तीन दिन में इस प्रस्ताव पर खुद सीएम योगी अंतिम फैसला लेंगे.
मंत्री ओमप्रकाश राजभर इस समय गाजीपुर में हैं. उन्होंने से बात करते हुए कहा कि शासन को भेजकर प्रधानों के ही नेतृत्व में प्रशासक नियुक्त करने की बात कही गई है. उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इसे जल्द ही सहमति दे देंगे. इस मौके पर ओमप्रकाश राजभर ने अब्बास अंसारी को लेकर भी जवाब दिया. कहा कि अब्बास अंसारी समाजवादी पार्टी के नेता हैं. समाजवादी पार्टी के जितने भी लोग उनकी पार्टी से चुनाव लड़े थे, वह सभी लोग समाजवादी पार्टी से टिकट मांग रहे हैं. जहां तक अब्बास अंसारी की बात है तो वह कभी भी उनकी पार्टी के विधायक नहीं थे.
तीन दिन बचा है पंचायतों का कार्यकाल
उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल महज तीन दिन बचा है. मौजूदा कार्यकाल 26 मई को पूरा हो जाएगा. इससे पहले नए चुनाव कराने होंगे. चूंकि ऐसा संभव नहीं है, ऐसे में नई पंचायतों के गठन तक गांवों में विकास कार्य जारी रखने के लिए ग्राम पंचायत संचालन का अधिकार के साथ प्रशासक नियुक्ति करने होंगे. उधर, उत्तर प्रदेश सरकार ने ओबीसी आरक्षण के लिए विशेष आयोग का गठन कर दिया है. उम्मीद है कि यह आयोग अगले तीन महीने में अपनी रिपोर्ट पेश कर देगा. इसके बाद नए सिरे से चुनाव का निर्णय लिया जा सकेगा.
पीडीए को बताया परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी
ओमप्रकाश राजभर ने एक बार फिर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव और उनके पीडीए पर करारा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि पीडीए का अर्थ समाज का कोई वर्ग नहीं, बल्कि परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी है. पी से परिवार, डी से डिंपल और ए से अखिलेश यादव है. यही उनका पीडीए है. उन्होंने आरक्षण के सवाल पर कहा कि अखिलेश यादव आरक्षण खाने का काम करते हैं. ओमप्रकाश के इस बयान से राजनीतिक हल्के में नई सरगर्मी शुरू हो गई है.