मानसून ने बदली चाल, यूपी में आज और कल जमकर बरसेंगे बादल; IMD का बड़ा अपडेट

उत्तर प्रदेश में अगले 48 घंटों में कई जिलों में भारी बारिश की संभावना है, जिससे जलभराव हो सकता है. IMD ने झांसी, कानपुर, आगरा सहित 12 से अधिक जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है. प्रदेश में अभी भी बारिश सामान्य से 25% कम है, जिसे मानसून की मौजूदा सक्रियता कुछ हद तक सुधार कर सकती है.

प्रयागराज मे भारी बारिश और जलभराव के बीच चलती गाड़ियां (फाइल फोटो) Image Credit: PTI

उत्तर प्रदेश में मानसून पूरी तरह से सक्रिय है. गंगा के मैदानी इलाकों में मानसूनी हवाएं मजबूत हो गई हैं, जबकि उत्तरी मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण का असर अब पूरे प्रदेश में दिखाई देने लगा है. इसके चलते आज और कल कई जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश और बिजली गिरने की संभावना है.

लखनऊ, मेरठ और कानपुर में बुधवार को कई इलाकों में बारिश दर्ज की गई. नोएडा और गाजियाबाद में सुबह से बारिश जारी है. मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिनों तक प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा और कई जगहों पर जलभराव की स्थिति भी बन सकती है. गुरुवार को प्रदेश के 12 से ज्यादा जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट है.

इन इलाकों में भारी बारिश को लेकर IMD का अलर्ट

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले 48 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग ने झांसी, कन्नौज, कानपुर देहात, एटा, आगरा, तिरोज़ाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, जालौन, झांसी और ललितपुर में भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी किया है. इस दौरान तेज हवा और बिजली गिरने की भी संभावना है.

इसके अलावा, बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, फतेहपुर, कानपुर नगर, उन्नाव, रायबरेली, लखनऊ, बाराबंकी, प्रयागराज, प्रतापगढ़, गोरखपुर, बस्ती, देवरिया, बहराइच, सीतापुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी, बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत, रामपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर समेत कई जिलों में अनेकों स्थान पर बारिश का अनुमान है.

यूपी में अब तक 296.4 मिमी बारिश, 25 प्रतिशत कम

IMD के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अब तक 296.4 मिमी वर्षा हुई है, जो सामान्य 394.1 मिमी से 25 प्रतिशत कम है. पूर्वी यूपी में 293.7 मिमी बारिश हुई, जबकि 421.8 होनी चाहिए. यह 30% कम है. वहीं, पश्चिमी यूपी में 300.3 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य 355.3 मिमी से 15% कम है. मानसून की मौजूदा सक्रियता से इस कमी में कुछ हद तक सुधार हो सकता है.

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