संत रविदास के सहारे 2027 की तैयारी? दलित वोट बैंक के लिए बीजेपी की नई रणनीति
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा ने संत रविदास की 650वीं जयंती को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने का अभियान शुरू करने का फैसला किया है. 29 जुलाई से 20 फरवरी 2027 तक चलने वाले इस कार्यक्रम के तहत संत रविदास के जीवन और सामाजिक समरसता के संदेश को देशभर में पहुंचाया जाएगा. वाराणसी की जन्मस्थली से 131 कलशों में पवित्र मिट्टी देश के विभिन्न राज्यों में भेजी जाएगी. भाजपा इसे सामाजिक समरसता का अभियान बता रही है.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने चुनावी और सामाजिक स्तर पर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. युवाओं के आंदोलन, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे और बदलते सामाजिक समीकरणों के बीच भाजपा ने अब संत शिरोमणि रविदास की 650वीं जयंती को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने का फैसला किया है. पार्टी इसे सामाजिक समरसता का अभियान बता रही है.
भाजपा का यह अभियान केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि 29 जुलाई (गुरु पूर्णिमा) से शुरू होकर 20 फरवरी 2027 (माघी पूर्णिमा एवं संत रविदास जयंती) तक देशभर में चलेगा. इस दौरान संत रविदास के जीवन, दर्शन और सामाजिक समरसता के संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाने का दावा किया जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग इसे दलित समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति के रूप में देख रहा है.
वाराणसी से पूरे देश तक जाएगी संत रविदास की जन्मस्थली की मिट्टी
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ ने वाराणसी में जनप्रतिनिधियों और संगठन पदाधिकारियों की बैठक के दौरान इस अभियान की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 28 जुलाई को देश के विभिन्न हिस्सों से 131 टोलियां संत रविदास की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर पहुंचेंगी. इन टोलियों के माध्यम से 131 कलशों में जन्मस्थली की पवित्र मिट्टी भरी जाएगी. अगले दिन 29 जुलाई को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संत समाज की उपस्थिति में कलश पूजन एवं आरती का आयोजन होगा.
इसके बाद 30 जुलाई को ये सभी कलश उत्तर प्रदेश के 98 संगठनात्मक जिलों, देश के 27 राज्यों और छह संगठनात्मक जोन के लिए रवाना किए जाएंगे. भाजपा का कहना है कि इन कलशों के माध्यम से संत रविदास की जन्मस्थली की पवित्र मिट्टी देशभर के गांवों और बस्तियों तक पहुंचेगी, जहां उसका पूजन किया जाएगा.
भाजपा का दावा— सामाजिक समरसता का संदेश
भाजपा तरुण चुघ का कहना है कि संत रविदास केवल किसी एक समाज या क्षेत्र के संत नहीं थे, बल्कि उन्होंने पूरी दुनिया को समानता, मानवता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया. तरुण चुग ने कहा कि संत रविदास का पूरा जीवन समाज में ऊंच-नीच की भावना समाप्त करने और सभी वर्गों को समान सम्मान दिलाने के लिए समर्पित रहा। इसलिए उनकी 650वीं जयंती को ऐतिहासिक स्तर पर मनाया जाएगा.
क्या दलित वोट बैंक है असली लक्ष्य?
हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस अभियान को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि उत्तर प्रदेश में दलित मतदाता चुनावी राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण वर्ग है. राज्य की करीब 300 विधानसभा सीटों पर अनुसूचित जाति का वोट चुनाव परिणाम प्रभावित करता है. ऐसे में भाजपा का यह अभियान चुनावी दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार का कहना है कि भाजपा लंबे समय से बसपा के पारंपरिक वोट बैंक में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने का प्रयास कर रही है. उनके अनुसार लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा अब फिर से दलित समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है. उनका कहना है कि संत रविदास के माध्यम से भाजपा सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर संवाद स्थापित करना चाहती है, जिसका राजनीतिक प्रभाव भविष्य में दिखाई दे सकता है.
संतों के पास राजनीति क्यों पहुंचती है?
संत रविदास पर लंबे समय से शोध कर रहे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर सदानंद शाही इस पूरे घटनाक्रम को अलग नजरिए से देखते हैं. उनका कहना है कि भारतीय राजनीति में संतों और महापुरुषों की विरासत हमेशा राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रही है. वे कहते हैं कि कोई भी राजनीतिक दल पूरी तरह निःस्वार्थ भाव से किसी संत के पास नहीं जाता. हर राजनीतिक दल अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने के लिए ऐसे आयोजनों का सहारा लेता है.
