जब एक साथ बैठे हिंदू और मुस्लिम पक्ष, 15 मिनट में तय हो गया ज्ञानवापी का भविष्य; जानें क्या होगा आगे

काशी के ज्ञानवापी विवाद पर पहली बार हिंदू-मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट की पहल पर एक साथ बैठे. 15 मिनट की बैठक में दोनों पक्षों ने मध्यस्थता से इनकार कर दिया, जिससे आपसी समझौते की संभावना खत्म हो गई. अब ज्ञानवापी का भविष्य अदालत के फैसले पर निर्भर करेगा. यह 35 साल में पहली ऐसी कोशिश थी, जो विफल रही.

ज्ञानवापी: समझौता वार्ता बेनतीजा, मामला अब अदालत ही सुलझाएगी Image Credit:

काशी में आस्था के केंद्र ज्ञानवापी का विवाद वैसे तो काफी समय से चल रहा है, लेकिन बीते 35 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब इस मुद्दे को सुलझाने के लिए हिन्दू और मुस्लिम पक्ष एक मंच पर आए. सुप्रीम कोर्ट की पहल पर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट परिसर में हुई दोनों पक्षों की बैठक में दोनों ही पक्षों ने मध्यस्थता से इनकार कर दिया. इस प्रकार दोनों पक्षों के समान दृष्टिकोण से ज्ञानवापी मामले का भविष्य भी लगभग साफ हो गया है.

जानकारी के मुताबिक मंगलवार की दोपहर 1:30 बजे न्यायिक समिति के सामने दोनों पक्ष उपस्थित हुए थे. करीब 15 मिनट यानी 1:45 तक दोनों पक्षों की बैठक हुई. इस दौरान दोनों पक्षों ने ‘ना’ कहा और इसी के साथ आपसी समझौते की संभावना भी खत्म हो गई. इस प्रकार कचहरी के मनोरंजन कक्ष में हुई बैठक विफल साबित हुई. इसमें दोनों ही पक्ष मध्यस्थता के लिए सहमत नहीं हुए. हिंदू पक्ष के पक्षकार ने कहा कि ज्ञानवापी परिसर हमारा है. उसमें हमें कोई मध्यस्थता नहीं चाहिए. वहीं मुस्लिम पक्ष ने भी कानूनी लड़ाई जारी रखने पर सहमति दी.

1991 से चल रहा है केस

ज्ञानवापी का केस 1991 से चल रहा है. इस अति संवेदनाशील मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी ओर से पहल करते हुए समझौते की कोशिश की थी. इसी कोशिश के तहत दोनों पक्षों को एक साथ बैठाने का प्रयास किया. इस प्रयास के तहत दोनों पक्ष एक साथ बैठे तो, लेकिन समझौते की कोई सूरत नज़र नहीं आई. आखिर में यह प्रयास विफल हो गया और अब एक बार फिर कोर्ट से ही फैसला आने की उम्मीद है.

कल क्या हुआ?

दोपहर डेढ़ बजे सिविल कोर्ट के मिडिएशन सेंटर में न्यायिक समिति बैठी. न्यायिक समिति के प्रमुख जज मुकुल आनंद पाण्डेय, आलोक कुमार, नितिन सिंह और महेंद्र प्रताप मौजूद थे. दोपहर 1:32 पर मुस्लिम पक्ष पहुंचा. इसमें अकलाख अहमद, रईस अहमद, मुमताज़ अहमद और तौहीद खां थे. मुस्लिम पक्ष से न्यायिक समिति ने पूछा कि ‘क्या आपसी समझौते से ये मसला हल हो सकता है?’ इसके जवाब में मुस्लिम पक्ष ने साफ इनकार कर दिया.

हिंदू पक्ष ने दिया ये जवाब

दोपहर 1:32 पर हिन्दू पक्ष न्यायिक समिति के समक्ष उपस्थित हुआ. समिति ने इनसे भी वही सवाल पूछा. इसके जवाब में हिंदू पक्ष के वकील सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने कहा कि मामला हिन्दुओं की आस्था से जुड़ा है और इस संवेदनशील मसले का हल अदालत के फैसले से होना चाहिए. आपसी समझौते से ये संभव नही है. इस प्रकार महज 15 मिनट में ही दोनों पक्षों ने एक सुर में मध्यस्थता की उम्मीद को खारिज कर दी.

क्या बोलें मुस्लिम पक्ष के वकील?

टीवी 9 डिजिटल ने मुस्लिम पक्ष के एक वकील अकलाख़ अहमद से बातचीत की. उनसे पूछा कि क्या आप लोग पहले से ही तय कर लिए थे कि आपसी समझौते पर कोई बात स्वीकार ही नहीं करनी? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि न्यायिक समिति आपसी समझौता कराने के लिए नहीं बैठी थी. वो सिर्फ ज्ञानवापी मसले का हल आपसी समझौते से हो सकता है या नहीं, ये जानने के लिए बैठी थी. उन्हें जवाब केवल हां या नहीं में चाहिए था.

एक दूसरे को ठहराया जिम्मेदार

हिन्दू पक्ष के वकील सुभाष नंदन चतुर्वेदी से भी टीवी9 ने यही सवाल किया. इसके जवाब में उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष ने पहले ही समिति के सामने पहुंचकर ना कह दिया. हालांकि ज्ञानवापी परिसर हमारी आस्था से जुड़ा है और हमको वो पूरा का पूरा चाहिए. इसमें समझौते की कोई गुंजाईश ही नहीं है. अब अगस्त में 21, 22 और 25 तारीख को मिडिएशन को लेकर दिल्ली में बैठक होने वाली है.

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