यूपी में गौ रक्षा की अलख जगाएंगे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, अब हर विधानसभाओं का करेंगे दौरा

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 81 दिवसीय गौविष्ठी यात्रा का ऐलान किया है. इसका मकसद गौ माता को राज्य माता का दर्जा दिलाना और गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना है. गोरखपुर से यह यात्रा 403 विधानसभाओं में पहुंचेगी, जहां मतदाताओं को गौ रक्षा के मुद्दे पर वोट देने के लिए प्रेरित करेगी.

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (फाइल फोटो)

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शुक्रवार को 81 दिवसीय गौविष्ठी यात्रा का आह्वान किया है. इसका मकसद यूपी में गौ माता को राज्य माता का दर्जा दिलाना और गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना है. तीन मई से शुरू होने वाली ये यात्रा सभी 403 विधानसभाओं में जाएगी और वोटरों को गौ रक्षा के मुद्दे पर वोट देने के लिए प्रेरित करेगी.

वाराणसी के विद्या मठ में पत्रकारों से बातचीत में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि यह यात्रा गोरखपुर से शुरू होकर 81 दिनों के बाद पुनः गोरखपुर पहुंचेगी. उन्होंने यह भी कहा कि गऊ रक्षा को लेकर जितना प्रयास उन्होंने उत्तर प्रदेश में किया है, अगर उतना प्रयास वो बंग्लादेश या फिर म्यांमार में किए होते तो अब तक सफल हो जातें.

यूपी में अगर कोई दूसरी सरकार होती तो…

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य ने साथ ही योगी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में अगर कोई दूसरी सरकार होती तो अब तक गऊ माता को पशु सूचि से बाहर कर उनको राज्य माता का दर्जा मिल गया होता. उन्होंने अपनी यात्रा को गऊ माता को समर्पित बताया है. साथ ही मतदाताओं को गौ रक्षा के मुद्दे पर वोट करने की अपील करेंगे.

उन्होंने कहा, ‘हम लोगों से अपील करेंगे कि वो गऊ माता के प्रति अपना समर्पण दिखाते हुए अपने मतदान करने की प्रवृत्ति भी बदलें. अब तक बिजली, सड़क, पानी पर आप वोट देते आए हो, इसलिए 78 साल में एक भी ऐसी सरकार नही आई जो गऊ रक्षा के प्रति संवेदनशील हो. आप गऊ रक्षार्थ मतदान करना शुरू करेंगे तो सरकारों को भी बाध्य होना पड़ेगा.’

यात्रा पूरी होने के बाद लखनऊ में बड़ी सभा

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी कहा कि गोरखपुर में यात्रा पूरी होने के बाद वो लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना के साथ दूसरी यात्रा की रूप रेखा तय करेंगे. इससे पहले शंकराचार्य ने यूपी सरकार को गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए 40 दिन की मोहलत दी थी, जिसके बाद अब इसे ‘धर्मयुद्ध’ का नाम देकर व्यापक जन आंदोलन बनाया जा रहा है.

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