गंगा में लापरवाही से नाव चलाई तो होगी जेल, बोटिंग के दौरान रील-सेल्फी बनाने वालों पर भी लगेगा जुर्माना

गंगा में बोटिंग के दौरान रील और सेल्फी लेने वालों पर वाराणसी प्रशासन सख्त हो चुका है. ऐसा करने वालों से भारी जुर्माना वसूला जाएगा. इसके अलावा लापरवाही से नाव चलाने वाले संचालकों को छह महीने की जेल या दस हज़ार रूपये फाइन देना होगा.

काशी में बोटिंग

वाराणसी प्रशासन ने गंगा में बोटिंग के दौरान रील बनाने और खड़े होकर सेल्फी लेने पर रोक लगा दी है. नाव संचालकों को ये सुनिश्चित करना होगा कि सवारी बोटिंग के दौरान न सेल्फी ले और ना ही रील बनाएं. क्षमता से ज्यादा सवारी बिठाने और लाइफ पहनाए बिना नाव चलाने वाले संचालकों पर कार्रवाई की जाएगी.

नाव में रील बनाने पर लगेगा जुर्माना

अगर कोई भी नाव संचालक प्रशासन के आदेश के मानने में लापरवाही करता है तो उसपर बीएनएस की धारा 282 के तहत कार्रवाई होगी. इसके तहत उसे छह महीने की जेल या दस हज़ार रूपये जुर्माना देना होगा. इसके अलावा नाव में रील बनाने और खड़े होकर सेल्फी खींचने वालों पर भी जुर्माना लगाया जाएगा.

16 फरवरी की दुर्घटना को देखते हुए प्रशासन ने लिया फैसला

प्रशासन ने ये फैसला 16 फरवरी यानी सोमवार की दोपहर हुई दुर्घटना के बाद लिया. इस घटना में एक नाव गंगा नदी में पूरी तरह से समा गई थी. हालांक‍ि सतर्कता की वजह नाव में सवार पांच लोगों को क‍िसी तर‍ह से बचा लिया गया था. लेकिन प्रशासन ने घटना को गंभीरता से लेते हुए नाव संचालन के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दिया है.

जानें क्या है गाइडलाइन

  • सवारियों के बिना लाइफ जैकेट पहने नाव का संचालन नहीं होगा
  • साथ ही सवारी चलते नाव में सेल्फी और रील नहीं बनाएंगे.
  • तय स्पीड से ज़्यादा बोट की गति नहीं होनी चाहिए.
  • प्रदूषण करने वाले मोटर बोट और बिना रजिस्ट्रेशन वाले बोट का संचालन नहीं होगा.
  • नाव संचालक नशा कर के नाव नही चलाएंगे और सवारियों से अभद्रता नहीं करेंगे.
  • सवारी चढ़ाते या उतारते समय नाव संचालक सतर्कता बरतेंगे और जल्दबाजी नहीं दिखाएंगे.
  • नाव संचालक सवारियों से तय किराए से ज़्यादा नहीं वसूलेंगे.

नावों के रूट के लिए ये दिशा-निर्देश

प्रशासन ने नावों के रूट के लिए भी खास निर्देश दिया है. नए रूट प्लान के अनुसार अब राजघाट से अस्सी घाट जाने वाली नावें पक्के घाट के किनारे-किनारे चलेंगी. वापसी के समय नावों को गंगा के उस पार से होकर वापस आना होगा. अब नाव चालक गंगा के बीचोबीच अपनी मर्जी से नाव नहीं चला सकेंगे और उन्हें तय रास्ते का ही पालन करना होगा.