जंतर-मंतर पर जो दिखा, उससे महिला समाज का सिर शर्म से झुक गया: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विकसित भारत के लिए संस्कारवान और अनुशासित युवा पीढ़ी को आधार बताया. उन्होंने जंतर-मंतर घटना पर दुख व्यक्त करते हुए महिलाओं के सम्मान और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के पालन पर जोर दिया. राज्यपाल ने कहा कि बेटियों को वेद और उपनिषद का अध्ययन करना चाहिए.
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि संस्कारवान, अनुशासित और शिक्षित युवा ही विकसित भारत की मजबूत नींव हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत बनाने का जो लक्ष्य निर्धारित किया है, उसे शिक्षा, अनुशासन और भारतीय संस्कृति से जुड़े संस्कारों के बल पर ही हासिल किया जा सकता है.
राज्यपाल ने हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा, ‘पिछले दिनों जंतर-मंतर पर जो दृश्य देखने को मिला, उससे पूरे महिला समाज का सिर शर्म से झुक गया’. हालांकि उन्होंने किसी संगठन या घटना का नाम नहीं लिया, लेकिन युवाओं से मर्यादा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का पालन करने की अपील की.
‘बेटियों को वेद-उपनिषद का अध्ययन करना चाहिए’
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के मुख्य भवन स्थित सभागार में बुधवार को आयोजित 44वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं. राज्यपाल ने कहा कि संस्कृति से ही संस्कार पैदा होते हैं और बेटियों को वेद, उपनिषद, श्रीमद्भगवद्गीता, रामायण जैसे भारतीय ज्ञान परंपरा के ग्रंथों का अध्ययन करना चाहिए.
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उनके अनुसार शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करना भी है. दीक्षांत समारोह में 11,958 विद्यार्थियों को उनकी उपाधियां डिजिटल लॉकर के माध्यम से उपलब्ध कराई गईं. वहीं, 29 मेधावी विद्यार्थियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 51 स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया.
राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि ज्ञान तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग समाज और देश के विकास के लिए किया जाए. उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों को अपने जीवन में अपनाने की अपील की.