जिन सनातन पांडेय को राजभर ने बताया ‘बागी गुट’ का मुखिया, आखिर कौन हैं वह सपा सांसद?

ओमप्रकाश राजभर ने सपा में 'बागी गुट' का दावा कर सनसनी फैलाई, जिसका मुखिया उन्होंने सपा सांसद सनातन पांडेय को बताया. वहीं, पांडेय ने तुरंत इन अटकलों को खारिज करते हुए साफ किया कि कोई भी ताकत उन्हें सपा से अलग नहीं कर सकती. आईए इसकी कड़ी में जानते हैं कौन हैं सनातन पांडेय.

कौन हैं सपा सांसद सनातन पांडेय? Image Credit:

उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय नया सियासी विवाद खड़ा हो गया जब प्रदेश सरकार में मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के भीतर एक “बागी गुट” सक्रिय है. साथ ही कहा कि बागी गुट का नेतृत्व बलिया से सांसद सनातन पाण्डेय कर रहे हैं. राजभर के इस बयान ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी.

हालांकि, समाजवादी के सांसद सनातन पांडेय ने तुरंत सामने आकर इन अटकलों को खारिज कर दिया. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह समाजवादी विचारधारा से जुड़े रहे हैं और जीवन भर जुड़े रहेंगे. उन्होंने आगे यहां तक कहा कि दुनिया की कोई ताकत उन्हें समाजवाद और समाजवादी पार्टी से अलग नहीं कर सकती है. जानिए कौन हैं सनातन पांडेय.

पूर्वांचल में सपा के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में गिनती

पूर्वांचल की राजनीति में बलिया सांसद सनातन पांडेय एक परिचित और संघर्षशील चेहरे के रूप में जाने जाते हैं. बलिया की राजनीतिक जमीन से निकले सनातन पांडेय लंबे समय से समाजवादी आंदोलन से जुड़े रहे हैं. छात्र राजनीति से लेकर विधानसभा और फिर लोकसभा तक का उनका सफर संगठन के प्रति निष्ठा और जमीनी राजनीति की पहचान माना जाता है.

बलिया की राजनीति में उनकी पहचान एक ऐसे नेता की रही है जो अपने समर्थकों के बीच सीधे संवाद और आक्रामक राजनीतिक शैली के लिए जाने जाते हैं. सपा के संगठन में भी वह लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं और पूर्वांचल में पार्टी के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में उनकी गिनती होती है. हालांकि, वह अपने बेबाक बयानों से भी चर्चा में रहते हैं.

लोकसभी चुनाव के दौरान दिया था चर्चित बयान

सनातन पांडेय चुनावी सभाओं में अपने बेबाक बयानों के लिए भी चर्चा में रहे हैं. लोकसभा चुनाव के दौरान बलिया में एक सभा में उन्होंने भावुक अंदाज में कहा था. यदि इस चुनाव में बेईमानी हुई और जनता के जनादेश के साथ खिलवाड़ किया गया, तो यहां से मेरी लाश जाएगी. उनका यह बयान 2024 लोकसभा चुनाव के समय काफी सुर्खियों में रहा था.

इससे पहले भी वह कई मौकों पर चुनावी निष्पक्षता, प्रशासनिक हस्तक्षेप और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर तीखे बयान देते रहे हैं. राजभर के दावे के बाद सनातन पांडेय ने जिस तरह सार्वजनिक रूप से पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, उसे महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है. उन्होंने कहा कि राजनीति उनके लिए पद का नहीं बल्कि विचारधारा का विषय है और समाजवाद उनकी पहचान का हिस्सा है.

राजभर के बयान के क्या हैं मायने? जानिए

राजनीतिक डॉ अशोक यादव का मानना है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों के भीतर असंतोष और संभावित टूट की चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं. ऐसे में ओमप्रकाश राजभर का बयान केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं बल्कि विपक्ष की एकजुटता पर सवाल खड़े करने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है.

हालांकि, सनातन पांडेय की ओर से तत्काल और स्पष्ट खंडन के बाद फिलहाल समाजवादी पार्टी में किसी बड़े बगावती घटनाक्रम के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं. लेकिन इतना जरूर है कि राजभर के एक बयान ने पूर्वांचल की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी. फिलहाल, जिस नेता को राजभर ने ‘बागी गुट का मुखिया’ बताया, उनसे उनको पटखनी मिली है.

Follow Us