आगरा: अदालत में ‘मुर्दा’ घोषित आरोपी निकला जिंदा, 12 साल पुराने केस में नया मोड़
आगरा में जिस आरोपी को मृत घोषित कर दिया गया था, वह शहर में स्कूटी दौड़ाते हुए पाया गया. आरोपी ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर मुकदमा बंद कर लिया था. वहीं, अब उसको जीवत देखकर वादी के पसीने छूट गए, उन्होंने पुलिस में शिकायत की. पुलिस जांच में भी 'मृत घोषित' आरोपी जिंदा पाया गया है.
उत्तर प्रदेश के आगरा से एक फिल्मी पटकथा जैसा वास्तविक मामला सामने आया है. 26 साल पुराने एक मुकदमे में खुद को मृत घोषित करवाकर कानूनी कार्यवाही बंद करवाने वाला मुख्य आरोपी न केवल जीवित मिला, बल्कि वह शहर की सड़कों पर स्कूटी दौड़ाते हुए भी पाया गया. पुलिस की ताजा जांच रिपोर्ट ने आरोपी के इस बड़े फर्जीवाड़े की पोल खोल दी है.
आरोपी की ओर से अदालत को गुमराह कर केस बंद करवाया गया था. फर्जीवाड़ा तब सामने आया, जब उसके नाम पर 2016 में एक्टिवा स्कूटरी खरीदी गई, वहीं साल 2019 में उस वाहन का चालान भी कटा था. अब मुकदमा पुनर्जीवित होगा और आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी की नई धाराएं लगेंगी. वादी ने सख्त कानूनी कार्यवाही की मांग की है.
जानिये क्या है पूरा मामला ?
मामला राजकुमार वर्मा बनाम विद्या देवी आदि वर्तमान परिवाद संख्या 1266/2012 से जुड़ा है, जो आगरा के थाना न्यू आगरा में मूल परिवाद संख्या 242/1999 के अंतर्गत धारा 467 और 468 (जालसाजी) के तहत चल रहा था. इस मामले में आरोपी तारा चंद्र शर्मा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी थे. लेकिन उसने कोर्ट को गुमराह कर मुकदमा बंद करा लिया.
आरोपी तारा चंद्र शर्मा ने खुद को मृत घोषित करते हुए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाया. साल 2013 में पुलिस ने अदालत में उसका मृत्यु प्रमाण पत्र दाखिल कर रिपोर्ट सौंपी. इसमें बताया गया कि आरोपी तारा चंद्र की मृत्यु 2 सितंबर 1998 को ही हो चुकी है. इस आधार पर अदालत ने 18 मार्च 2017 को उसके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त (Abate) कर दी थी.
ऐसे खुला राज, वादी की बड़ी भूमिका
वादी राजकुमार वर्मा की सक्रियता से आरोपी का धोखाधड़ी पकड़ी गई. वर्मा ने अदालत को कई डिजिटल साक्ष्य दिए. इसमें तारा चंद्र शर्मा ने वर्ष 2016 में अपने नाम से एक एक्टिवा स्कूटर (UP80DU8873) पंजीकृत कराया है. साल 2019 में उस वाहन का चालान भी कटा था. आरोपी वर्तमान में सक्रिय मोबाइल नंबर और बैंक खातों का संचालन कर रहा है.
कोर्ट के आदेश पर थाना न्यू आगरा पुलिस ने भी मामले की जांच की. जब पुलिस उसके घर पहुंची, तो आरोपी के बेटे ने बताया की कि उसके पिता जीवित हैं. साथ ही आरोपी तारा चंद्र शर्मा खुद पुलिस के सामने आया. अब इस मामले में आरोपी के खिलाफ अदालत को गुमराह करने, फर्जी दस्तावेज और धोखाधड़ी की नई धाराओं के साथ मुकदमा चलेगा.