फिरोजाबाद: दरोगा राजवीर सिंह हत्याकांड में 15 साल बाद फैसला, 3 को उम्रकैद, दो को मिली ये सजा

फिरोजाबाद के चर्चित दरोगा राजवीर सिंह हत्याकांड में 15 साल बाद अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. पांच आरोपियों को दोषी ठहराया गया, जिनमें से तीन को उम्रकैद और दो को 7-7 साल की सजा मिली है. यह मामला 2010 में दरोगा की लूट और हत्या से जुड़ा था.

प्रतीकात्मक तस्वीर Image Credit:

फिरोजाबाद जिले के चर्चित दरोगा राजवीर सिंह लूट व हत्या कांड में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पांच आरोपियों को दोषी ठहराया है. एडीजे-2 सर्वेश पांडेय की अदालत ने तीन आरोपियों को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई, जबकि दो अन्य आरोपियों को सात-सात साल के कठोर कारावास के साथ जुर्माने से दंडित किया गया.

घटना 2 अगस्त 2010 की है, जब थाना रसूलपुर में तैनात दरोगा राजवीर सिंह विवेचना के सिलसिले में कानपुर गए थे. वापस लौटने के बाद वह थाना नगला खंगर क्षेत्र स्थित अपने घर जा रहे थे. रास्ते में अज्ञात बदमाशों ने उन्हें रोककर उनकी सरकारी रिवाल्वर और मोटरसाइकिल लूट ली और गोली मारकर हत्या कर दी थी.

मृतक दरोगा के बेटे ने दर्ज कराया था मुकदमा

इस सनसनीखेज वारदात से पूरे पुलिस विभाग में शोक और आक्रोश फैल गया था. मामले में मृतक दरोगा के बेटे की तहरीर पर थाना नगला खंगर में मुकदमा दर्ज किया गया. जांच के दौरान पुलिस ने साक्ष्य जुटाए और आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की.  48 वर्षीय राजवीर सिंह इटावा के यादव नगर बलरई, जसवंतनगर के रहने वाले थे.

घटना के बाद पुलिस ने तुरंत मुकदमा दर्ज कर लिया और जांच शुरू की. पुलिस ने बाद में आरोपियों की निशानदेही पर सरकारी रिवाल्वर बरामद कर ली थी. वहीं, जांच के बाद पुलिस ने पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. शनिवार को कोर्ट में हुई सुनवाई के अभियोजन पक्ष ने 15 गवाह पेश किए, जिसपर ऐतिहासिक फैसला आया.

5 आरोपियों में 3 को उम्रकैद, दो को 7 साल जेल

कोर्ट ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर तीन मुख्य आरोपियों रामनरेश, सत्यपाल और पंकज को धारा 302, 394 व 411 के तहत दोषी मानते हुए उम्रकैद और कुल 2,70,000 रुपये का जुर्माना लगाया. वहीं दो अन्य सहयोगियों शिवरतन और बंगाली को सात-सात साल की सजा और कुल 1.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. आरोपियों को जिला कारागार भेजा गया.