संतकबीर नगर: चकबंदी विभाग से तंग आकर किसान ने लगाई फांसी, घर में मफलर में लटका मिला शव
संतकबीर नगर में चकबंदी विभाग की कथित कार्यप्रणाली से तंग आकर एक किसान ने आत्महत्या कर ली. आरोप है कि विभाग की ओर से उनकी कीमती सड़क किनारे की जमीन को भ्रष्टाचार के चलते 'ताल' में बदल दिया गया. पीड़ित किसान ने महीनों न्याय के लिए भटकने के बाद उम्मीद खो दी थी.
संतकबीर नगर के धनघटा थाना क्षेत्र के संठी गांव में शनिवार सुबह एक किसान ने आत्महत्या कर ली. 47 वर्षीय किसान प्रभुनाथ प्रजापति का शव उनके पुराने घर में मफलर के फंदे से लटका मिला. परिजनों ने किसान की मौत का जिम्मेदार चकबंदी विभाग की अनियमितता को ठहराया है, जिसके कथित कार्यप्रणाली से मृतक मानसिक तनाव में थे.
परिजनों का आरोप है कि चकबंदी अधिकारियों ने किसान की सड़क किनारे स्थित कीमती जमीन को काटकर ‘ताल’ (पोखरे) में डाल दिया था, जिससे वह परेशान रहते थे. मृतक के परिजनों ने रोते हुए बताया कि किसान प्रभुनाथ पिछले कई महीनों से न्याय के लिए तहसील और चकबंदी कार्यालय के चक्कर काट रहे थे. लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिलता था.
न्याय न मिलने से आहत होकर मौत को लगाया गले
अधिकारियों के सामने गुहार लगाने के बावजूद न्याय नहीं मिलने से उनकी उम्मीद पूरी तरह टूट गई थी. इसी से आहत होकर प्रभुनाथ ने सुबह करीब 7:30 बजे मौत को गले लगा लिया. परिजनों का आरोप है कि विभाग के अधिकारियों ने भ्रष्टाचार या मनमानी के चलते उनकी मुख्य मार्ग वाली उपजाऊ जमीन को छीनकर उसे ताल की बंजर जमीन में बदल दिया.
किसान इसी बात को लेकर परेशान थे कि अब उनके परिवार का गुजर-बसर कैसे होगा. प्रभुनाथ अपने घर के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे. उनकी मृत्यु के बाद पत्नी कमलेश देवी, तीन बेटों और वृद्ध माता गीता देवी का रो-रोकर बुरा हाल है. गांव में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है. सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची धनघटा पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम भेजा है.
लापरवाही पाई गई, तो होगी सख्त कार्रवाई- SDM
धनघटा SHO ने बताया कि मृतक के परिजन द्वारा लिखित तहरीर आई है, जिसमें चकबंदी विभाग से किसी जमीन को लेकर तनाव चल रहा था. पुलिस ने तहरीर के आधार पर जांच शुरू कर दी. वहीं, इस घटना ने चकबंदी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि अगर किसान की शिकायत सुनी जाती, तो वह जीवित होते.
एसडीएम धनघटा डॉ सुनील कुमार ने बताया कि यह अत्यंत दुखद घटना है. किसान की जमीन से जुड़े चकबंदी के अभिलेखों की जांच कराई जा रही है. यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. पीड़ित परिवार को हर संभव सरकारी सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा.