34 बच्चों से दरिंदगी का वीडियो, 47 देशों में डार्क वेब पर बेचा; ऐसे फांसी के फंदे तक पहुंचे चित्रकूट के हैवान

बांदा की अदालत ने बच्चों से दरिंदगी और डार्क वेब पर वीडियो बेचने वाले चित्रकूट के दंपति को फांसी की सजा सुनाई है. इस हैवान जोड़ी ने 34 मासूमों का यौन शोषण कर उनके वीडियो 47 देशों में बेचे थे. साढ़े पांच साल पहले इंटरपोल के इनपुट से मामले का खुलासा हुआ था. मामले की जांच सीबीआई ने की और अब इस मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. जिसमें बांदा में पहली बार किसी महिला को फांसी की सजा हुई है.

सांकेतिक तस्वीर Image Credit:

उत्तर प्रदेश में बांदा की अदालत ने हैवान दंपति को फांसी की सजा सुना दी है. इस हैवान को करीब साढ़े पांच साल तक चली अदालती कार्रवाई के बाद उसके मुकाम तक पहुंचाया जा सका है. इसने 34 मासूम बच्चों के साथ ना केवल दरिंदगी की थी, बल्कि इन बच्चों के अश्लील वीडियो बनाकर डार्क वेब वेबसाइट के जरिए 47 देशों में बेचकर मोटी रकम भी बनाई थी. मामले का खुलासा होने के बाद इस हैवान जेई रामभवन कुशवाहा और उसकी पत्नी दुर्गावती को सस्पेंड कर दिया गया था. वहीं अब दोनों को फांसी की सजा सुनाई गई है.

इस हैवान को फांसी की सजा सुनाने के साथ बांदा की अदालत के नाम एक नया रिकॉर्ड भी जुड़ गया है. यहां की अदालत ने पहली बार किसी महिला को फांसी की सजा सुनाई है. केस डायरी के मुताबिक 31 अक्टूबर 2020 को इंटरपोल की ओर से दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय को एक मेल आया था. इसमें इनपुट था कि जेई रामभवन कुश्वाहा तीन अलग-अलग मोबाइल नंबरों से प्रतिबंधित वेबसाइट डार्कवेब से जुड़ा है और बच्चों के अश्लील वीडियो बनाकर 47 देशों में बेच रहा है. इसी प्रकार इंटरपोल ने सीबीआई को दो और मेल इसी तरह के भेजे थे.

पेन ड्राइव में मिला अश्लील वीडियो

इस इनपुट को गंभीरता से लेते हुए सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की और नवंबर 2020 में इस हैवान के बांदा में नरैनी कस्बा स्थित आवास पर दबिश दी. इस दौरान सीबीआई ने आरोपी रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को अरेस्ट करते हुए तलाशी ली तो इनके पास से वह पेन ड्राइव बरामद हो गई, जिसमें 34 बच्चों के अश्लील वीडियो और 679 तस्वीरें सुरक्षित की गईं थीं. सीबीआई ने जांच शुरू की तो पता चला कि यह हैवान और इसकी पत्नी ना केवल बांदा में, बल्कि आसपास के जिले चित्रकूट, हमीरपुर आदि में छोटे-छोटे बच्चों को शिकार बनाते थे.

बच्चों को ऐसे बनाते थे शिकार

सीबीआई के मुताबिक ये बदमाश 3 साल तक के बच्चों को भी शिकार बनाने से भी नहीं हिचकते थे. ये बच्चों को लालच देकर झांसे में लेते थे और फिर उनके यौन शोषण करते थे. इस दौरान आरोपी वीडियो बनाते और फोटो खींच लेते थे. बाद में यही वीडियो और फोटो प्रतिबंधित वेबसाइट डार्कवेब, सोशल मीडिया साइट्स, वीडियो प्लेटफॉर्म्स और अन्य वेबसाइटों को बेचते थे. सीबीआई के सेवानिवृत्त अपर पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने इस मामले की जांच की, जिसमें पूरे मामले का खुलासा हुआ था.

पहली बार किसी महिला को फांसी की सजा

मामले की सुनवाई बांदा की पॉक्सो कोर्ट में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत में हुई. जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद गंभीर टिप्पणी की. कहा कि यह अपराध इतना घिनौना है कि मौत की सजा भी कम है. बांदा अदालत ने पहले भी हत्या, अपहरण और गैंग रेप जैसे मामलों में करीब 23 लोगों को फांसी की सजा सुनाई है, लेकिन पहली बार इस अदालत से किसी महिला को फांसी की सजा सुनाई गई है.