बंगाल में TMC की हार से विपक्ष में बेचैनी, ममता से मिलेंगे अखिलेश; क्या है मुलाकात के मायने?
पश्चिम बंगाल में TMC की हार के बाद विपक्ष में बेचैनी है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव कोलकाता में ममता बनर्जी से मुलाकात करेंगे. इस बैठक में बंगाल चुनाव नतीजों, 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की रणनीति और INDIA गठबंधन को मजबूत करने पर चर्चा होगी. यह मुलाकात विपक्षी दलों की एकजुटता और भाजपा को चुनौती देने की भविष्य की योजनाओं का संकेत देती है.
पश्चिम बंगाल में टीएमसी की हार से पूरे विपक्ष में बेचैनी है. इसी क्रम में सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव बुधवार को कोलकाता पहुंच रहे हैं. वहां वह ममता बनर्जी से मिलकर हार के कारणों पर बात करेंगे. इस दौरान साल 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों से पहले इंडिया गठबंधन की एकजुटता पर भी बात करेंगे. बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद किसी प्रमुख विपक्षी दल के नेता का बंगाल का यह पहला दौरा होगा.
मंगलवार को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुद ममता बनर्जी ने इसकी पुष्टि की. कहा कि अखिलेश आज ही उनसे मिलना चाहते थे, लेकिन उन्होंने बुधवार को आने को कहा है. ममता बनर्जी ने कहा कि अखिलेश कल आएंगे. इसके बाद एक-एक करके सभी आएंगे. उन्होंने इशारे-इशारे में कहा कि उनका लक्ष्य INDIA गठबंधन को और मजबूत करना है. बता दें कि अखिलेश यादव पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान मैदान में उतरने के बजाय सोशल मीडिया पर ही ममता बनर्जी का समर्थन करते रहे थे.
नतीजों के बाद भी किए कई पोस्ट
चुनाव के नतीजे आने के बाद अखिलेश यादव ने सोमवार को भी सोशल मीडिया X पर कई पोस्ट किए. पहली पोस्ट में उन्होंने भाजपा की जीत को फरेब करार देते हुए शेर लिखा-‘हर फरेबी फतह की एक मियाद होती है, ये बात ही सच्चाई की बुनियाद होती है’. इसके बाद उन्होंने दूसरी पोस्ट में अखिलेश ने 2022 के उत्तर प्रदेश चुनाव और फर्रुखाबाद लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि मतगणना में केंद्रीय बलों का दुरुपयोग किया गया. उन्होंने ममता बनर्जी का पुराना वीडियो भी शेयर किया. फिर तीसरी पोस्ट में महिला आरक्षण पर तंज कसते हुए अखिलेश ने कहा कि जब परिणाम ही मनमर्जी से निकाले जा रहे हैं तो मुख्यमंत्री भी मनमर्जी से बन सकता है.
मुलाकात के क्या है मायने?
अखिलेश यादव और ममता बनर्जी की यह मुलाकात महज शिष्टाचार नहीं है. राजनीतिक विश्लेषक इसे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से जोड़ कर देख रहे हैं. वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार कहते कि इस बार की मुलाकात में बंगाल चुनाव नतीजों, केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग और आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है. अखिलेश यादव अच्छी तरह जानते हैं कि भाजपा के सामने अकेले मुकाबला करना कितना चुनौतीपूर्ण है. ममता बनर्जी के अकेले चुनाव लड़ने और परिणाम देखने के बाद सपा अध्यक्ष गठबंधन की अहमियत को और बेहतर तरीके से समझ चुके हैं.