यूपी चुनाव 2027: बीजेपी की बड़ी तैयारी, बनाया शासन-संगठन के ‘समन्वय’ का सुपर फॉर्मूला

यूपी विधानसभा चुनाव के देखते हुए शासन ने जिला प्रशासन समन्वय समिति के गठन का आदेश जारी किया है. साथ ही हम महीने इस समिति को एक बैठक करना अनिवार्य कर दिया गया है. इसके अलावा शिकायतों का भी निपटारा भी 7 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया गया है. पार्टी ने यह फैसला यूपी में शासन, प्रशासन और संगठन में समन्वय मजबूत करने के लिए लिया है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो) Image Credit:

यूपी में शासन, प्रशासन और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के संगठन के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण और नया कदम उठाया है. शासन ने जिला प्रशासन समन्वय समिति के गठन का आदेश जारी किया है. इसमे जिले के प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में हर महीने बैठक अनिवार्य होगी. इस बैठक में पहली बार प्रभारी मंत्री और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भाजपा के जिला अध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष भी शामिल होंगे. यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है.

हर महीने समन्वय समिति की बैठक अनिवार्य

शासन द्वारा जारी गोपनीय मार्गदर्शिका 2026 में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि समिति की बैठक हर महीने होनी अनिवार्य है. समन्वय समिति में प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठत में जिलाधिकारी, एसएसपी/एसपी, महानगरों पुलिस आयुक्त या उनके नामित अधिकारी, भाजपा जिला/महानगर अध्यक्ष,सहयोगी दलों के जनप्रतिनिधि, जिला पंचायत अध्यक्ष,महापौर नगर निगम क्षेत्रों के शामिल होंगे. मार्गदर्शिका में जोर दिया गया है कि स्थानीय समस्याओं का निदान जिला स्तर पर ही किया जाए. नीतिगत मुद्दों को शासन स्तर पर भेजा जाए. बैठक में लिए गए हर निर्णय का संक्षिप्त ब्योरा मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा जाएगा.

शिकायतों का निपटारा 7 दिनों के अंदर अनिवार्य

समन्वय की प्रक्रिया और समयसीमा मुख्य बैठक से पहले कोर कमेटी की बैठक कर विषयों का चयन किया जाएगा. अधूरी और पूरी परियोजनाओं की पहचान की जाएगी. विकास कार्यों की प्रगति पर सामूहिक समीक्षा होगी. सभी निर्णय सबकी सहमति से लिए जाएंगे. बैठक का मुख्य उद्देश्य सकारात्मक वातावरण बनाना और प्रशासन-संगठन के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है.स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, स्थानीय विवाद, थाना-तहसील संबंधित शिकायतों का समाधान करना 7 दिनों में अनिवार्य रहेगा. इसकी जिम्मेदारी डीएम और कप्तान की होंगी.

शिकायतों, सुझावों और मांगों पर मेरिट के आधार पर तत्काल कार्रवाई

किसी भी विकास कार्य के लिए बजट आवंटन, तकनीकी स्वीकृति आदि के लिए मुख्य सचिव और संबंधित विभाग 15 दिनों के भीतर पत्राचार करेंगे. कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों की व्यक्तिगत/सार्वजनिक शिकायतों, सुझावों और मांगों पर मेरिट के आधार पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी. प्रभारी मंत्री का जिले में न्यूनतम 24 घंटे का प्रवास अनिवार्य होगा. इसमें रात्रि विश्राम भी सुनिश्चित होगा. सूत्रों के मुताबिक, यह प्रयोग मिशन-2027 की तैयारियों को देखते हुए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. शासन की गोपनीय मार्गदर्शिका सभी जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है.

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