राम मंदिर ट्रस्ट में आएंगे नए चेहरे! स्थानीय संतों की होगी एंट्री, 22 जुलाई की बैठक पर सबकी नजर
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में नए सदस्यों की एंट्री तय है. 22 जुलाई की बैठक में स्थानीय संतों, प्रतिष्ठित नागरिकों और सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी को शामिल करने पर फैसला होगा. ट्रस्ट के पुनर्गठन में अयोध्या के संत समाज की लंबे समय से चली आ रही स्थानीय भागीदारी की मांग पूरी होगी. वहीं, राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड में आरोपियों ने कई अहम खुलासे किए हैं.
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में रिक्त पदों को भरने की कवायद तेज हो गई है. ट्रस्ट की 22 जुलाई को प्रस्तावित बैठक में कुछ नए ट्रस्ट सदस्यों के नाम पर अंतिम फैसला होने की संभावना है. इस बीच कई नाम चर्चा में भी हैं और संकेत मिल रहे हैं कि इस बार ट्रस्ट में अयोध्या के स्थानीय संतों और प्रतिष्ठित नागरिकों को अधिक प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है. वर्ष 2020 में ट्रस्ट के गठन के समय से ही अयोध्या का संत समाज ट्रस्ट में स्थानीय संतों की भागीदारी बढ़ाने की मांग करता रहा है.
माना जा रहा है कि इस बार ट्रस्ट के पुनर्गठन में इस मांग को प्राथमिकता मिलेगी. फिलहाल जो नाम सर्वाधिक चर्चा में हैं, उनमें पूर्व ट्रस्टी स्वर्गीय राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के पुत्र यतींद्र मिश्र के अलावा अयोध्या के वरिष्ठ पत्रकार, शिक्षाविद और साकेत पीजी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य वीएन अरोड़ा का नाम शामिल है. दोनों ही अयोध्या के स्थानीय निवासी हैं और लंबे समय से सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं.
इन संतों का भी है नाम
ट्रस्ट में इस बार संत समाज से बल्लभकुंज के महंत राजकुमार दास और हनुमत निवास के महंत मिथिलेश नंदिनीशरण के नाम शामिल किया जा सकता है. ये दोनों संत अयोध्या में सम्मानित धार्मिक व्यक्तित्व माने जाते हैं. हालांकि उनका मूल संबंध गोंडा जिले से है, लेकिन अयोध्या के धार्मिक और सामाजिक जीवन में उनकी सक्रिय भूमिका रही है. इसी प्रकार ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक पेशेवर बनाने के उद्देश्य से भारतीय सेना के एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी को ट्रस्ट का सदस्य या मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बनाए जा सकता है.
चढ़ावा चोरी में बड़ा खुलासा
उधर, राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड में बड़ा खुलासा हुआ है. पुलिस के रिमांड में आरोपियों ने कई अहम राज उगले हैं. बताया कि मंदिर में चोरी की शुरूआत महज 2000 रुपये से हुई थी. पहली चोरी सफल रही तो आरोपियों का मन बढ़ा और रोज चोरी की राशि बढ़ती चली गई. बाद में तो चढ़ावे की रकम में से 3 लाख रुपये या इससे भी अधिक की रकम रोज चोरी होने लगी. अब पुलिस इस वारदात के पूरे नेटवर्क और चोरी में शामिल अन्य लोगों की भूमिका खंगालने में जुट गई है.