पहली बारिश भी झेल पाया दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, ढाई महीने में ही धंसा; PM मोदी ने किया था उद्घाटन

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, जिसका उद्घाटन ढाई माह पूर्व पीएम मोदी ने किया था, पहली बारिश में ही बागपत के पास धंस गया और उसमें बड़े गड्ढे बन गए. इससे इसकी गुणवत्ता और 12,000 करोड़ की लागत में भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल उठे हैं. मुजफ्फरनगर में भी ऐसी ही समस्या सामने आई थी. स्थानीय लोग हादसों के खतरे से चिंतित हैं.

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे Image Credit:

देश का अत्याधुनिक और विश्वस्तरीय मानकों पर बना दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पहली बारिश भी नहीं झेल पाया है. उत्तर प्रदेश के बागपत में गांगनौली गांव के पास इस एक्सप्रेसवे में बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं. इससे एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार दौड़ने वाले वाहनों के साथ हादसे का खतरा पैदा हो गया है. रविवार को स्थानीय लोगों ने इन गड्ढों की तस्वीरें और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में अपलोड किया था. यह वीडियो और तस्वीरें अब तेजी से वायरल हो रही हैं.

जानकारी के मुताबिक पांच दिन पहले भी इस एक्सप्रेसवे में मुजफ्फरनगर के पास बड़े-बड़े गड्ढे होने की सूचना आई थी. वहीं अब पहली बारिश के बाद बने गड्ढों को लेकर इस एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं. 12 हजार करोड़ की लागत से बने इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगे हैं. दिल्ली से चलकर यह एक्सप्रेसवे बागपत के रास्ते देहरादून तक जा रहा है.

धंस गई रेलिंग

बागपत में गांगनौली गांव के पास इस एक्सप्रेस वे पर बनाई गए मिट्टी के पुस्तों में गड्ढे बन गए हैं. एक्सप्रेस-वे के किनारे पर लगी
रेलिंग भी धंस गई है. इससे मौके पर हादसों का खतरा बढ़ गया है. स्थानीय लोगों के मुताबिक इन गड्ढों को समय रहते बंद नहीं किया तो यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन 12 जून को सहारनपुर में किया था. उस समय केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कार से इस पूरे एक्सप्रेस-वे का निरीक्षण किया था.

मुजफ्फरनगर में भी धंसा था एक्सप्रेसवे

हाल ही में मुजफ्फरनगर में इस एक्सप्रेस-वे का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था. वीडियो में एक्सप्रेसवे में बने बड़े-बड़े गड्ढे साफ नजर आ रहे थे. वीडियो वायरल होते ही एनएचएआई के अधिकारी हरकत में आए और निर्माण एजेंसी को नोटिस जारी किया था. इसके बाद कई ठेकेदारों की फर्मों को ब्लैकलिस्ट भी किया गया था.

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