बरेली: खुले नाले में गिरने से युवक की मौत मामले में बड़े अफसर बचे, छोटे अफसरों पर गिरी गाज
बरेली के सेटेलाइट बस अड्डे के पास खुले नाले में गिरकर हरदोई निवासी तौहीद की मौत के मामले में नगर निगम की जांच रिपोर्ट सामने आ गई है.रिपोर्ट में नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है.
नोएडा सेक्टर 150 में युवराज नाम के इंजीनियर की मॉल के बेसमेंट के लिए खाली छोड़ गए गड्ढे में गिरकर मौत हो गई थी. ऐसा ही एक हादसा कुछ दिनों पहले बरेली से भी सामने आया था. यहां एक खुले नाले में युवक गिर गया था. लंबे सर्च ऑपरेशन के बाद भी युवक को नहीं बचाया जा सका था. लेकिन अब इस मामले में छोटे कर्मचारियों पर गाज गिरी है. बड़े अफसरों को क्लीन चिट दे दी गई है.
दरअसल बरेली के सेटेलाइट बस अड्डे के पास खुले नाले में गिरकर हरदोई निवासी तौहीद की मौत के मामले में नगर निगम की जांच रिपोर्ट सामने आ गई है. 24 मार्च की रात हुए इस हादसे के करीब 30 घंटे बाद तौहीद का शव बरामद किया गया था. नगर निगम के सूत्रों के मुताबिक नाले, सड़क को तोड़ने और जेसीबी में लगने वाले डीजल को मिलाकर 16 लाख रुपये भी खर्च हुए थे.
जांच टीम की रिपोर्ट आई सामने
मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर आयुक्त ने अपर नगर आयुक्त शशिभूषण राय के नेतृत्व में जांच टीम गठित की थी. अब इसकी रिपोर्ट आ गई है. रिपोर्ट में दो जूनियर इंजीनियर, एक सफाई निरीक्षक, सफाई नायक, सुपरवाइजर और संबंधित ठेकेदार को दोषी ठहराया गया है. जांच में साफ कहा गया है कि नाले का खुला होना और सुरक्षा मानकों की अनदेखी ही तौहीद की मौत की मुख्य वजह बनी.
वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को किया गया नजरअंदाज
इस रिपोर्ट में नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है. यही वजह है कि अब इस कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि नाले की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी बड़े अधिकारियों की होती है, लेकिन उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया गया.इस मामले की तुलना नोएडा की एक हालिया घटना से भी की जा रही है, जहां इसी तरह की लापरवाही पर बड़े अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई थी.
घटना के बाद नगर निगम आया हरकत में
वहीं, बरेली में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई से प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं. नगर निगम के सूत्रों के मुताबिक, तौहीद के शव को निकालने में करीब 16 लाख रुपये खर्च हुए. इसमें जेसीबी, डीजल, नाला तोड़ने और सड़क खुदाई का खर्च शामिल है. वहीं, नगर निगम अब हरकत में आया है. खुले नालों के आसपास बैरिकेडिंग और ढक्कन लगाने का काम शुरू कर दिया गया है.
नगर आयुक्त ने क्या कहा?
पूरे मामले पर नगर आयुक्त संजीव मौर्य का कहना है कि जांच रिपोर्ट तथ्यों के आधार पर तैयार की गई है. रिपोर्ट मिल चुकी है और अब दोषी पाए गए कर्मचारियों के खिलाफ सस्पेंशन सहित आगे की कार्रवाई की जाएगी. साथ ही, शहर में खुले नालों को ढकने और सुरक्षा इंतजाम पुख्ता करने के निर्देश दिए गए हैं.