…तो इस वजह से लगातार 5 दिन से भगवान हनुमान-मां दुर्गा की मूर्ति की परिक्रमा कर रहा है कुत्ता, डॉक्टर्स ने बताया
बिजनौर में पिछले 5 दिन से एक कुत्ता पहले भगवान हनुमान फिर मां दुर्गा की प्रतिमा का चक्कर लगा रहा है. अब इसको लेकर डॉक्टरों ने एक खुलासा किया है. डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते के सिर पर पहले चोट लगी थी. इससे उसका दिमागी संतुलन बिगड़ गया है. इसके चलते वह इस तरह मूर्तियों की परिक्रमा कर रहा है.
बिजनौर के नंदपुर गांव के एक मंदिर से कुत्ते का भगवान हनुमान और माता दुर्गा के प्रतिमा के चक्कर लगाने का वीडियो वायरल हो रहा था. पिछले 5 दिनों से कुत्ते ने लगातार मंदिर परिसर में कुत्ते ने बिना रुके, बिना थके पहले तीन दिन तो हनुमान जी की मूर्ति के चक्कर लगाए. फिर मंदिर परिसर में ही दुर्गा माता की मूर्ति की परिक्रमा लगाने लगा.
कुत्ते का भगवान हनुमान और माता दुर्गा की प्रतिमा का चक्कर लगाने की खबर वायरल होते ही लोग बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचने लगे हैं. लोगों ने कुत्ते की पूजा करनी शुरू कर दी है. लगातार 24 घंटे मां दुर्गा की मूर्ति की परिक्रमा लगाने के बाद कुत्ते ने गुरुवार को 3 घंटे आराम किया. इस दौरान ग्रामीणों ने मंदिर परिसर में एक जगह गद्दा डाल दिया. इसपप पर यह कुत्ता आ कर बैठ गया और आराम करने लगा. मंदिर में आने वाले श्रद्धांलुओ ने कुत्ते के सामने ही माथा टेकना शुरू कर कर दिया. उसके बाद कुत्ता फिर फिर मां दुर्गा की मूर्ति के चक्कर लगाने लगा.
ग्रामीणों इसे मान रहे हैं चमत्कार
कई ग्रामीण कुत्ते में किसी साधु या ऋषि-मुनि की आत्मा का वास मान रहे है. वहीं, कुछ ने कुत्ते को भैरो नाथ का साया बताया. बड़ी संख्या में कुत्ते को देखने महिलाएं मंदिर पहुंच रही हैं. . मंदिर के बाहर दो तीन लोगो ने प्रसाद और बच्चो के खिलौनो की दुकान भी लगा ली है.
डॉक्टरों ने क्या बताया?
चार पांच दिनों से बिना कुछ खाये पिए परिक्रमा लगा रहे कुत्ते को देख सभी हैरान है. नंदपुर गांव के इस मंदिर में अब लगातार भजन कीर्तन और पूजा पाठ चल रहा है. इस बीच बिजनौर से वेटनरी डाक्टरो की एक टीम भी कुत्ते को देखने पहुंची थी. टीम में आये डाक्टर्स के मुताबिक कुत्ते के सिर पर चोट लगा था. ऐसा लग रहा है कि इससे उसका दिमागी संतुलन बिगड़ गया है. इससे वह एक ही साइड में घूम रहा है.
स्थानीय लोगों ने कुत्ते की बात से जताई असहमति
फिलहाल, स्थानीय निवासियों ने डाक्टर्स की बात से असहमति जताई . उनका कहना है कि कुत्ते पर जरूर किसी ऋषि मुनि या साधू संयासी की आत्मा का साया है. इससे पूजा परिक्रमा में आनंद की अनुभूति करा रही है. वरना बिना कुछ खाये पिए और बगैर थके इतने दिनों से कोई कुत्ता कैसे परिक्रमा लगा सकता है. कुत्ते के आगे एक कटोरे में दूध भी रखा गया लेकिन उसने नहीं पिया, खाने के लिये रोटी भी डाली गई तो वह भी उसने नहीं खाई. फिलहाल यह कुत्ता आस्था, अंधविश्वास, जिज्ञासा और वैज्ञानिक रहस्य का केंद्र बना हुआ है.