अभी मौन हूं, अंतिम रिपोर्ट के बाद बोलूंगा… चंपत राय ने तोड़ी चुप्पी, आरोपों को बताया अनर्गल
राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने कथित चढ़ावा चोरी आरोपों पर चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने बताया कि SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद वे सभी बिंदुओं पर विस्तार से जवाब देंगे. आरोपों को अनर्गल बताते हुए, उन्होंने अपने 45 साल के प्रचारक जीवन को खुली किताब करार दिया है.
राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और गबन के मामले में आरोपों का सामना कर रहे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने ‘एक्स’ पर रामभक्तों के नाम एक खुला पत्र जारी किया. इसमें कहा कि वह SIT की अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद सभी आरोपों का क्रमवार जवाब देंगे.
चंपत राय ने अपनी पोस्ट की शुरुआत श्रीरामचरितमानस की प्रसिद्ध चौपाई- ‘धीरज धर्म मित्र अरु नारी, आपद काल परखिए चारी’ से की. इसका मतलब है कि धैर्य, धर्म, मित्र और नारी की वास्तविक परीक्षा संकट के समय ही होती है. अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि 7 जून से व्यक्तिगत रूप से उन पर भी अनेक आरोप लगाए गए, लेकिन वह मौन हैं.
‘सभी बिंदुओं पर अपना उत्तर क्रमानुसार दूंगा’
चंपत राय ने यह लेटर अपने हाथों से लिखा है. इसमें उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को अनर्गल बताया. साथ ही SIT की प्राथमिक रिपोर्ट का भी जिक्र किया. चंपत राय ने बताया कि 6 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक में एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी, जो अब सार्वजनिक हो गई है. उनका कहना है कि जबकि यह रिपोर्ट परम गोपनीय थी.
उन्होंने आगे लिखा, ‘आज सभी को मैं भरोसा दिलाता हूं कि SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद, फैलाए जा रहे, सभी बिंदुओं पर अपना उत्तर क्रमानुसार दूंगा, सभी सत्य सामने आ जाएंगे.’ चंपत राय ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन पर कहा, ‘मैं अक्टूबर 1991 से अयोध्या में संगठन द्वारा भेजा गया, मेरा प्रचारक जीवन 45 साल से, मैं जहां भी रहा खुली पुस्तक के समान है.’
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई बड़े खुलासे
SIT की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है. जांच में गणना कक्ष में कार्यरत सभी 6 आरोपियों पर चोरी के आरोप पाए गए. ट्रस्ट द्वारा नियुक्त गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं. उन्हें नियमित तलाशी न कराने और सुरक्षा को प्रभावी ढंग से लागू न करने का प्रमुख दायित्व ठहराया गया.
वहीं रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू पर बिना औपचारिक अधिकार के हुंडियों की चाबियां संभालने और अपने रिश्तेदार मनीष कुमार यादव को गणना ड्यूटी पर लगवाने का आरोप है. इसके अलावा, ट्रस्ट और SBI दोनों की घोर लापरवाही उजागर हुई है. दोनों में हुए MoU और तय की गई SOP के अधिकांश प्रावधानों का केवल कागजों पर पालन हुआ, व्यवहार में नहीं.