जालौन डबल मर्डर: ग्राम प्रधान समेत 4 दोषियों को उम्रकैद, पेट्रोल डालकर जिंदा जलाया था; 8 साल बाद मिला न्याय

जालौन के डबल मर्डर केस में बड़ा फैसला आया है. 2018 के सनसनीखेज हत्याकांड में ग्राम प्रधान समेत चार दोषियों को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. साथ ही दोषी पर भारी जुर्माना भी लगाया है. करीब 8 साल तक चले ट्रायल के बाद यह फैसला आया है, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिला है.

2018 के जालौन डबल मर्डर केस में बड़ा फैसला Image Credit:

जालौन के कोंच कोतवाली क्षेत्र के ग्राम चंदुर्रा में साल 2018 में हुए सनसनीखेज डबल मर्डर केस में अदालत ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अपर जिला सत्र न्यायालय के एससी/एसटी कोर्ट, उरई ने ग्राम प्रधान समेत चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 1,12,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है.

अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोषियों में गौरीशंकर पुत्र पुनू, रविन्द्र पुत्र महेश (वर्तमान ग्राम प्रधान), धर्मेन्द्र बरार पुत्र गौरीशंकर और गरीबदास पुत्र सुखई, निवासीगण ग्राम चंदुर्रा, कोतवाली कोंच शामिल हैं. सभी आरोपियों को न्यायालय ने गंभीर अपराध का दोषी मानते हुए सख्त सजा सुनाई है. करीब 8 साल तक चले लंबे ट्रायल के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिला है.

पुरानी रंजिश के चलते दो लोगों को जिंदा जला दिया

जिला शासकीय अधिवक्ता लखन लाल निरंजन ने बताया कि घटना 25 मार्च 2018 की रात करीब 8 बजे की है. वादी रिंकू के अनुसार, उसके पिता गिरवर और भाई सुशील घर में स्थित परचून की दुकान पर बैठे थे. उसी दौरान पुरानी रंजिश के चलते आरोपी वहां पहुंचे और अपने साथ लाए पेट्रोल को दुकान और सुशील पर छिड़ककर आग लगा दी थी.

इस भयावह घटना में रिंकू भी अपने परिजनों को बचाने के प्रयास में झुलस गया. गंभीर रूप से झुलसे गिरवर और सुशील को अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें ग्वालियर और बाद में दिल्ली रेफर किया गया. इलाज के दौरान 26 मार्च 2018 को गिरवर की मृत्यु हो गई, जबकि सुशील ने 1 अप्रैल 2018 को दम तोड़ दिया. इस घटना से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था.

6 आरोपी में एक की मौत, 4 को सजा, एक नाबालिग

घटना के बाद 26 मार्च 2018 को रिंकू की तहरीर पर कोतवाली कोर्ट में मु0अ0सं0 105/18 के तहत धारा 147, 302, 149, 307, 427 और 436 भादवि में मुकदमा दर्ज किया गया. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर विवेचना पूरी कर 13 मई 2018 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया.

मुकदमे के दौरान एक आरोपी महेश की मृत्यु हो गई, जबकि दीपक के नाबालिग होने के कारण मामला किशोर न्याय बोर्ड में विचाराधीन रहा. 19 दिसंबर 2019 को आरोप तय होने के बाद एससी/एसटी कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई. वहीं, अब कोर्ट ने चारों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. करीब 8 साल बाद इस फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय मिला है.

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