125 सालों में पांचवीं बार सूखा निकला जून, क्या जुलाई भी देने वाली है धोखा? जानें क्यों रूठ गया मौसम
उत्तर प्रदेश में मानसून के आगमन के बावजूद अल नीनो के प्रभाव से कम बारिश हो रही है. इस साल जून सूखा रहने के कारण खेती-किसानी और भूजल स्तर प्रभावित हो रहे हैं. बीते 125 सालों में यह पांचवीं बार है जब जून में इतनी कम बारिश हुई है. किसानों को ट्यूबवेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं.
मौसम विभाग का दावा है कि मानसून आ गया, लेकिन अभी तक पूरे उत्तर प्रदेश में कहीं भी ऐसी बारिश नहीं हुई, जिससे मानसूनी बारिश कहा जा सके. दरअसल मानसून 2026 पर अल नीनो (El Nino) का बड़ा असर देखने को मिल रहा है. इस अल नीनो की वजह से सामान्य से भी कम बारिश हो रही है. बल्कि यदि बीते 125 साल में हुए बारिश के आंकड़े देखे तो पता चलता है कि ऐसा पांचवीं बार हुआ है, जब जून का महीने सूखे-सूखे निकल गया.
जानकारों के मुताबिक इन परिस्थितियों का सीधा असर खेती किसानी पर पड़ेगा. भूगर्भ जल का लेबल भी नीचे गिर सकता है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक साल 1901 में जून का महीना बिलकुल सूखा गुजरा था. उसके बाद से लेकर अब तक पांच बार ऐसा हुआ है कि जून के महीने को सबसे अधिक ‘सुखा’ दर्ज किया गया है. इस दौरान 50 प्रतिशत से भी कम बारिश दर्ज हुई है. वैज्ञानिकों के मुताबिक यह स्थिति चिंताजनक है.
दिखने लगा असर
मानसून के दिनों में भी कम बारिश होने का असर साफ नजर आ रहा है. मैदानी इलाकों में तालाब पोखर सूखे पड़े हैं. खेती किसानी भी प्रभावित हो रही है. ट्यूबवेल के सहारे किसान खेती करने को मजबूर हैं. इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा रही हैं. मौसम विभाग का कहना है कि अभी तो शुरूआत है, आगे भी बारिश की कोई खास संभावना नजर नहीं आ रही.
पूर्वांचल-अवध में हुई बारिश
रविवार को उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों खासतौर पर पूर्वांचल और अवध के जिलों में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश हुई. हालांकि इस बारिश से तापमान पर कोई असर नहीं पड़ा. बल्कि उमस और बढ़ गई. मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को भी प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में गरज और चमक के साथ बारिश हो सकती है. सोमवार का न्यूनतम तापमान 27 डिग्री और अधिकतम 33 डिग्री रहने का अनुमान है.