यूपी में अब 25 साल पुराने मकान तोड़ बनाए जा सकेंगे अपार्टमेंट, जर्जर सोसाइटी का होगा रीडेवलपमेंट
शहरी पुनर्विकास नीति-2026 के तहत अब प्रदेश में 25 साल पुराने मकान और तीन साल से बंद पड़े उद्योगों को तोड़ उनके स्थान पर अपार्टमेंट बनाए जा सकेंगे. इसके अलावा सरकारी और प्राइवेट सोसाइटीज, जिनकी स्थिति जर्जर हो चुकी है, वह भी सरकार की इस पहल का लाभ ले सकते हैं.
योगी सरकार ने राज्य में 25 साल पुराने जर्जर भवनों और तीन साल से बंद पड़े उद्योगों को तोड़ उनके स्थान पर हाउसिंग सोसायटी बसाने या फिर अपार्टमेंट बनाने रास्ता साफ कर दिया है. सरकार ने इसके लिए शहरी पुनर्विकास नीति-2026 को भी मंजूरी दे दी है.
न्यूनतम 2000 वर्ग मीटर भूमि की जरूरत
शहरी पुनर्विकास नीति-2026 के तहत यह प्रोजेक्ट उन्ही मकान और भवन पर लागू होगा, जो 1500 वर्ग मीटर भूमि पर बने हुए होंगे. पहले प्राधिकरण की तरफ से उनका स्ट्रक्चर ऑडिट किया जाएगा. इसमें देखा जाएगा मकान किस स्थिति तक जर्जर हो चुका है. मकान या भवन की स्थिति देखकर प्राधिकरण इसके रीडेवलपमेंट की अनुमति दे देगा. हालांकि, एकल आवासीय या एकल भवन सरकार के इस नीति के दायरे में नहीं आएंगे. विकास प्राधिकरणों की तरफ पुनर्विकास योजना का काम खुद करना होगा.
सिर्फ इन भवनों पर ये योजना करेगी काम
सरकार के फैसले के मुताबिक लीज पर आवंटित भूमि जैसे नजूल भूमि, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट और अन्य शासकीय भूमि जिसके फ्री-होल्ड में परिवर्तन नहीं हुआ है, उन्हें भी ऐसे किसी योजना और प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता है. हालांकि, तीन साल से बंद पड़े उद्योग और घाटे में चल रही इकाइयों पर हाउसिंग सोसायटी बसाने या फिर अपार्टमेंट बनाने की अनुमति दी जा सकेगी. नॉन कंफर्मिंग उद्योगों, , शासकीय, निगमों की खाली, कारागार, बस टर्मिनल, डिपो ( बस स्टॉप छोड़कर) पर भी ये योजना लागू हो सकेगी.
हाउसिंग सोसाइटीज को भी मिलेगा लाभ
हाउसिंग सोसाइटी और रेजीडेंट वेलफेयर सोसायटी भी सरकार के इस योजना का लाभ ले सकते हैं. उन्हें इसमें शामिल होने के लिए संबंधित विकास प्राधिकरणों को आवेदन देना होगा. हालांकि, इसके लिए सोसाइटी के दो तिहाई सदस्यों की अनुमति आवश्यक है. अप्रूवल मिलने के 6 महीने के अंदर वहां रहने वालों से घर खाली कराना होगा और 1 साल के अंदर काम शुरू कराना होगा. शहरी पुनर्विकास नीति-2026 के तहत हो रहे निर्माण काम तो तीन साल के भीतर पूरा करना होगा. ऐसा नहीं होने पर दो साल का विस्तार दे दिया जाएगा.
भवन बनने तक वहा रहने वालों के लिए करनी होगी दूसरी व्यवस्था
ईडब्ल्यूएस व एलआईजी के 10-10 फीसदी मकान बनाने पर शेल्टर फीस में छूट दी जाएगी. इसके अलावा अगर कोई भवन तोड़ा जाता है, उसे फिर से नया बनाया जाता है तो वहां रहने वालों को दूसरे स्थानों पर रहने की व्यवस्था की जाएगी या किराया दिया जाएगा. भवन फिर से तैयार होने पर मकान के आवंटन पहले की ही तरह किए जाएंगे. अगर ऐसा संभव नहीं होता है तो लॉटरी सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा.