UP में अब सरकारी राशन की दुकानें होंगी मर्ज, 500 से कम कार्डधारक वाली दुकानों पर तलवार

उत्तर प्रदेश में प्राइमरी स्कूलों के मर्जर के बाद अब सरकारी राशन की दुकानों का विलय किया जाएगा. नियम पहले जैसा ही है, यानी जहां जिस राशन की दुकानों पर 500 से कम कार्डधारक होंगे, उसका नजदीकी बड़े दुकानों में विलय किया जाएगा. फील्ड रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश जारी कर दिए हैं.

सरकारी राशन की दुकानों का होगा विलय (फाइल फोटो) Image Credit:

उत्तर प्रदेश के करोड़ों राशन कार्डधारकों के लिए एक अहम खबर है. यूपी सरकार अब उन सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों (कोटे की दुकानों) को बंद करने या पास की बड़ी दुकानों में मर्ज करने पर गंभीरता से विचार कर रही है, जहां राशन कार्डधारकों की संख्या 500 से कम है. केंद्र सरकार के सुझाव पर यह कदम उठाया जा रहा है.

केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण कर यह सख्त सुझाव दिया है. इसमें पाया गया कि 500 से कम कार्डधारकों वाली दुकानें आर्थिक रूप से ‘अलाभकारी’ (Non-viable) साबित हो रही हैं. कोटेदारों की आय बेहद कम होने के कारण वितरण प्रणाली में अनियमितताएं और शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं.

सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र में 47,081 दुकानें प्रभावित

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कुल 52,218 ऐसी दुकानें हैं जहां कार्डधारकों की संख्या निर्धारित मानक से कम है. इनमें शहरी क्षेत्र में 5,137 और ग्रामीण क्षेत्र में 47,081 दुकानें शामिल हैं. खाद्य एवं रसद विभाग ने इस संबंध में सभी मंडलीय और जिला स्तरीय अधिकारियों को तत्काल फील्ड रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश जारी कर दिए हैं.

सरकार का कहना है कि दुकानों के विलय के बाद भी अनाज की आपूर्ति पूरी तरह सुनिश्चित रहेगी. लेकिन जमीनी स्तर पर लाभार्थियों को राशन के भारी थैले लेकर अब घर से अधिक दूर जाना पड़ेगा. खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन सकती है. प्रशासन आम जनता को होनी वाली चुनौतियों पर भी मंथन कर रहा है.

e-PoS मशीनों के जरिए वितरण की होगी मॉनिटरिंग

जानकारों का मानना है कि मात्र 500 कार्डधारकों वाली दुकानों पर कमीशन इतना कम होता है कि कोटेदार के लिए किराया, बिजली और अन्य खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाता है. इससे भ्रष्टाचार और घटतौली की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. विलय के बाद एक कोटेदार के पास 1,000 से 1,500 कार्डधारक होंगे, जिससे उनकी आय में सम्मानजनक वृद्धि होगी.

इसके अलावा, सरकार ‘ई-पॉश’ (e-PoS) मशीनों के जरिए अब बड़े क्लस्टर्स में पूरे वितरण को बेहतर तरीके से मॉनिटर भी कर पाएगी. हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियों का ध्यान रखना बड़ी चुनौती रहेगी, ताकि किसी भी व्यक्ति को ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर ज्यादा दूरी तय न करना पड़े. यह बदलाव जल्द ही लागू होने की संभावना है.

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