दस्यु सुंदरी फूलन देवी की बड़ी बहन को अखिलेश यादव ने क्यों दिया ये बड़ा पद?

अखिलेश यादव ने निषाद वोट बैंक साधने के लिए फूलन देवी की बहन रुक्मिणी देवी को सपा महिला सभा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है. यह कदम प्रदेश की 80 विधानसभा सीटों पर महत्वपूर्ण निषाद मतदाताओं को प्रभावित करने और पूर्वांचल व बुंदेलखंड में पार्टी की पकड़ मजबूत करने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. रुक्मिणी देवी का राजनीतिक अनुभव और परिवार का प्रभाव सपा के लिए अहम साबित हो सकता है.

फूलन देवी की बड़ी बहन रुक्मणि देवी Image Credit:

निषाद वोट बैंक को साधने के लिए सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने बड़ा दाव खेला है. उन्होंने दस्यु सुंदरी फूलन देवी की बड़ी बहन रुक्मणि देवी निषाद को पार्टी में महिला सभा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है. रुक्मिणी देवी निषाद जालौन के ग्राम शेखपुर गुड्ढा, पुरवा की निवासी हैं और लंबे समय से राजनीति में सक्रिय भी हैं. वह दस्यु सुंदरी व सपा की पूर्व सांसद फूलन देवी की बड़ी बहन हैं.

रुक्मणि देवी की शादी औरैया के बूढ़ा दाना गांव में हुई है. उनके तीन बेटे और दो बेटियां हैं. उनका बड़ा बेटा मथुरा मध्य प्रदेश पुलिस में इंस्पेक्टर है और ग्वालियर में पोस्टिंग है. वह शुरू से ही सपा में सक्रिय रही हैं और संगठन के लिए काम करती रहीं हैं. हाल ही में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें एक स्कॉर्पियो भी उपलब्ध कराई थी. अचानक उन्हें पार्टी में महिला सभा का अध्यक्ष बनाए जाने पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है.

80 सीटों पर है समाज का प्रभाव

माना जा रहा है कि यह नियुक्ति सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. प्रदेश में निषाद समुदाय की आबादी करीब 4 चार प्रतिशत के आसपास है. खास बात यह है कि राज्य की करीब 80 विधानसभा सीटों पर निषाद मतदाताओं की संख्या एक लाख के आसपास है. जबकि करीब 165 सीटों पर यह समाज चुनावी नतीजों को प्रभावित करने में सक्षम है.

इन क्षेत्रों में है निषाद वोट बैंक

पूर्वांचल में निषाद समाज की जड़ें मजबूत हैं. गोरखपुर, वाराणसी, आजमगढ़, बलिया, मऊ, जौनपुर, सुल्तानपुर, फतेहपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर, भदोही और प्रयागराज जैसे जिलों में इस समुदाय की अच्छी-खासी मौजूदगी है. इन क्षेत्रों में निषाद मतदाता न केवल स्थानीय चुनावों, बल्कि विधानसभा और लोकसभा के रुझान तय करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं. अखिलेश यादव ने इस फैसले से पूर्वांचल के साथ-साथ बुंदेलखंड को भी साधने की कोशिश की है. क्योंकि रुक्मिणी देवी बुंदेलखंड की रहने वाली है.

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