जिनकी कृपा से गोपियों को मिले कन्हैया, अब क्रिकेटर सिद्धू ने लगाई अरदास; जानें कात्यायनी मंदिर की कहानी
पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिद्धू ने बुधवार को वृंदावन के कात्यायनी देवी मंदिर में पूजा की. यह वही मंदिर है जहां गोपियों ने कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए आराधना की थी और उनकी मनकामना पूरी हुई थी. यह मंदिर 51 शक्ति पीठों में से एक है, जहां हजारों श्रद्धालु अपने मनोरथ पूर्ण करते हैं. सिद्धू ने भी माता से मनौती मांगी है.
पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू बुधवार की सुबह वृंदावन में थे. यहां उन्होंने मां कात्यानी देवी मंदिर में विधि विधान से पूजा की और मां से मनौती मांगी. सिद्धू अपने परिवार के साथ धार्मिक यात्रा पर वृंदावन पहुंचे थे. पूजन के बाद कात्यायनी मंदिर के पुजारी ने उन्हें माता की चुनरी, प्रसाद और पटका भेंट किया. इस दौरान माता के दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने सिद्धू के साथ खूब सेल्फी खिंचाई.
बता दें कि यह वही कात्यायनी मंदिर है, जिसमें माता की मूर्ति द्वापर युग में गोपियों ने खुद अपने हाथों से बनाई थी. गोपियां माता की नियमित पूजा करती और पति रूप में भगवान कृष्ण को पाने की मनौती मांगती थीं. माता की कृपा से गोपियों को मनवांछित फल मिला था. इसके अलावा इस मंदिर को माता के 51 शक्ति पीठों में से भी एक माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि माता के दर्शन पूजन से भक्तों के मनोरथ सहज ही पूरे हो जाते हैं.
रोज आते हैं हजारों श्रद्धालु
माता के इस मंदिर में देश के अलग अलग राज्यों से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी हजारों की तादाता में श्रद्धालु रोज आते हैं और विधि विधान से माता की पूजा करते हैं. इसी क्रम में पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू भी बुधवार की सुबह मंदिर पहुंचे और माता के दर्शन पूजन किए. इस दौरान मंदिर के पुजारी ने उन्हें मंदिर का भ्रमण कराया और मंदिर के इतिहास की जानकारी दी. यह सुनकर सिद्धू ने भविष्य में यहां आते रहने की बात की.
गोपनीय था कार्यक्रम
पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू का वृंदावन भ्रमण का कार्यक्रम गोपनीय था. वह सीधे कात्यायनी मंदिर पहुंचे और परिसर में करीब 20 मिनट तक रुके. इसके बाद उनका काफिला दिल्ली के लिए रवाना हो गया. इस दौरान मीडिया ने उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने जवाब देने से साफ इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि यह उनकी धार्मिक यात्रा है, इसलिए कोई राजनीतिक सवाल नहीं होने चाहिए.